हत्या को आत्महत्या बनाने का प्लान फ्लॉप, धारा 302 के तहत मां और बेटे को आजीवन कारावास की सजा…

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रायगढ़,(आधार स्तंभ)  : छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिला में एक पत्नी ने अपने बेटे के साथ मिलकर पति की हत्या कर दी। शराब के नशे में खाना खाने के दौरान ग्रामीण अपनी पत्नी-बेटे को डांटने के साथ ही शौच कर दिया। जिससे गुस्से में आकर दोनों ने रस्सी से फंदा बनाकर उसका गला घोंट दिया। घटना के बाद मामले की सूचना पर पुलिस ने जांच करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया। जहां कोर्ट ने मां-बेटे को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। घटना लैलूंगा थाना क्षेत्र का है।घटना का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है कि 26 अगस्त 2021 को लैलूंगा थाना में सूचना प्राप्त हुई कि लच्छी राम सिदार निवासी चौकीदारपारा कोड़ामाई की मृत्यु हो गई है।

जिसके बाद थाना लैलूंगा के तात्कालीन निरीक्षक आरएन साय ने तत्काल ग्राम कोड़ामाई पहुंच कर घटना की जांच शुरू कर दी। लच्छी राम सिदार मृत अवस्था में घर के भीतर पड़ा था। वहां खून फैला हुआ था। ऐसे में मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना प्रभारी द्वारा सभी एंगल से जांच जारी रखा। जांच में चौंकाने वाला मामला सामने आया कि मृतक की पत्नी रुधनी सिदार 50 साल और उसके पुत्र परमेश्वर सिदार 29 साल ने प्लास्टिक की रस्सी से उसका गला घोंटा और उसकी हत्या कर दी।मृतक की पत्नी रूधनी सिदार से पूछताछ करने में उसने अपराध कबूल करते हुए यह बतलाया कि 25 अगस्त 2021 की रात 8-9 बजे के मध्य मृतक लच्छी राम सिदार शराब के नशे में धुत्त होकर घर आया और खाना मांगने लगा। तब वह और परमेश्वर सिदार घर में थे। मृतक लच्छी राम सिदार की पत्नी रूधनी सिदार ने उसे खाना परोसा। तभी लच्छी राम खाना खाते खाते अपनी पत्नी और बेटे को डांट फटकार कर रहा था और खाते खाते ही शौच कर डाला।

 

इस दौरान उसका बेटा परमेश्वर और उसकी पत्नी दोनों गुस्से में आ कर प्लास्टिक की रस्सी का फंदा बनाया और मृतक के गले में फंसा कर दोनों तरफ से खींच दिए। जिससे लच्छी राम सिदार सांसें थम गई। इसके बाद आरोपियों ने घटना को आत्महत्या का स्वरूप देने का पूरा प्रयास किया, लेकिन पुलिस की जांच से मामले का खुलासा हुआ।विवेचना अधिकारी आरएन साय ने विवेचना पूर्ण कर आरोपी मां बेटे के खिलाफ धारा 302 भारतीय दण्ड संहिता के तहत अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया था। न्यायालय अभिषेक शर्मा अपर सत्र न्यायाधीश घरघोड़ा ने मामले की सुनवाई करते हुए सभी साक्षियों के बयान दर्ज कराए और उभय पक्ष के बहस सुनने के पश्चात आरोपी मां-बेटे को हत्या का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही एक-एक हजार के अर्थदण्ड से दण्डित किया। न्यायालय ने मृतक के आश्रितों को विधिक सेवा प्राधिकरण रायगढ़ के माध्यम से क्षतिपूर्ति राशि 1 लाख रुपए दिलाए जाने की अनुशंसा की है। प्रकरण में राज्य की ओर से अपर लोक अभियोजक राजेश सिंह ठाकुर ने पक्ष रखा।

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