कोरबा(आधार स्तम्भ) : सरगबुंदिया कोल साइडिंग से कोयला चोरी का बहुचर्चित मामला अब तुल पकड़ते नजर आ रहा है। अब नई खबर यह आ रही है कि रेलमंत्री ने चार माह पहले सरगबुंदिया कोल यार्ड से कोयला चोरी के मामले में जांच के आदेश दिये थे। किन्तु इस पर अब तक किसी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं की गई है जिससे अब रेल्वे अधिकारियों, कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध नजर आ रही है।

ज्ञात हो कि बरपाली ग्राम से लगे सरगबुंदिया स्टेशन में दिसंबर 2022 से ट्रैन के रेक में कोल एडजस्टमेंट के नाम पर कोल साइडिंग शुरू किया गया है। रेल्वे कर्मचारियों के अनुसार कोल एडजस्टमेंट एक ट्रेन के बोगियों से ओवरलोड कोयला को निकालकर दूसरे ट्रैन या बोगियों में एडजस्ट करके भेजना होता है। किंतु सरगबुंदिया कोल साइडिंग में तो कोयला को हाईवा, ट्रेलर और ट्रक के माध्यम से बाहर भेजकर एडजस्ट किया जा रहा है। कुछ रेल्वे कर्मचारियों ने नाम न बताने की शर्त पर जानकारी दी है कि यहाँ तो ट्रेनों की आधी बोगियां तक खाली कर दी जा रही है।
सरगबुंदिया कोल साइडिंग का विरोध ग्रामीणों ने साइडिंग के शुरू होते ही करना शुरू कर दिया था किंतु क्षेत्र के कुछ जनप्रतिनिधि और दलालनुमा लोग अपनी रौब दिखाकर बरपाली बस्ती के प्रतिबंधित मार्ग से चोरी का कोयला हाईवा, ट्रेलर और ट्रकों में निकलवाने का काम कर रहे हैं, जिसके एवज में इन दलालों को साइडिंग के ठेकेदार एक मोटी रकम हर माह पहुँचाता है।

ग्रामीणों की समस्या को देखकर कुछ नेताओं ने इसकी सुध ली। जिसमें रामपुर विधानसभा के क्षेत्रीय विधायक ननकीराम कंवर ने 10 मार्च 2023 को कोरबा कलेक्टर संजीव झा को पत्र लिखकर कोल साइडिंग की वजह से स्थानीय लोगों की समस्याओं का जिक्र करते हुए कोल साइडिंग की अनुमति को निरस्त करते हुए कोल साइडिंग को बंद करने की मांग की थी। किन्तु तत्कालीन कोरबा कलेक्टर द्वारा इस पर किसी भी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं की गई।
तब विधायक महोदय द्वारा 5 अप्रैल 2023 को केंद्रीय रेल मंत्री को सरगबुंदिया कोल यार्ड से कोयला चोरी की जानकारी देते हुए पत्र प्रेषित किया गया। जिस पर केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा संज्ञान लेते हुए 28 अप्रैल को उक्त कोयला चोरी के मामले में संबंधित निदेशालय को जाँच के आदेश जारी किए गए थे। किंतु आज आदेश दिये लगभग चार माह बीत गए किन्तु किसी भी प्रकार की कोई जाँच या कार्यवाही की जानकारी नहीं मिली है। इससे यह प्रतीत होता है कि इस कोयला चोरी के खेल में कहीं न कहीं रेल्वे अधिकारी कर्मचारियों की भी मिली भगत है। जिसके वजह से अब तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं की गई है।
अब इस कोल साइडिंग औऱ अवैध कोल परिवहन को बंद कराने की जिम्मेदारी क्षेत्र की जनता ने अपने कंधो पर ले ली है। जिसकी शुरुआत करते हुए कोल साइडिंग से प्रभावित आसपास के सभी गांवों की जनता ने गुरुवार को कोरबा कलेक्टर को ज्ञापन सौंप कोल साइडिंग बन्द करने की मांग करते हुए एक सप्ताह का अल्टीमेटम दिया है। एक सप्ताह के अंदर कोई कार्यवाही नहीं होती है तो फिर क्षेत्र की जनता सड़क पर उतर कर अपने हक की लड़ाई लड़ेगी। शायद प्रशासन और ये ठेकेदार जनता जनार्दन की ताकत को भूल गए हैं। जब जनता अपने अधिकार के लिए सड़क पर उतर आती है तो मजबूत से मजबूत सरकार की भी कुर्सी हिल जाती है, रातों रात सरकार तक गिर जाती है। अब देखना यह है कि एक सप्ताह के समय में प्रशासन क्या कदम उठाती है।




