बरपाली(आधार स्तंभ) : सरगबुंदिया कोल साइडिंग और कोल परिवहन बन्द करने हेतु ग्रामीणों ने कोरबा कलेक्टर को लिखित आवेदन दिया है।
ज्ञात हो कि सरगबुंदिया रेल्वे स्टेशन में पिछले कुछ माह से कोल साइडिंग शुरू कर दिया गया है। जिसमें कोल एडजस्टमेंट के नाम पर कोयले का अवैध परिवहन प्रारंभ कर दिया गया है। जिस मार्ग से कोल परिवहन किया जा रहा है वह मार्ग आबादी क्षेत्र है। जिसमें लोगों के परिवार निवास करते हैं। साथ ही उक्त मार्ग में दो निजी विद्यालय, स्टेट बैंक, कोऑपरेटिव बैंक, तीन मेडिकल स्टोर, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स के अलावा बहुत सारी दुकानेंसंचालित हैं। जबकि सत्र 2010 में तत्कालीन कोरबा कलेक्टर द्वारा उक्त मार्ग पर भारी वाहन प्रतिबंधित किया गया था। अब तो स्थिति यह बन गई है कि दिन रात भारी वाहनों से कोल परिवहन अनवरत जारी है। जिससे ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है। क्षेत्र के लोग अब लामबद्ध होकर अब आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं। प्रथम चरण में कोरबा कलेक्टर को लिखित आवेदन दिया गया है जिसमें एक सप्ताह में अवैध परिवहन रोक कर कोल साइडिंग बन्द करने का निवेदन किया गया है।इसके बाद भी अगर प्रशासन नींद से नहीं जागती है तो ग्रामीणों द्वारा चक्काजाम और रेल रोको आंदोलन भी किया जाएगा।

कुछ अधिकारियों के परिजन भी हैं भागीदार, नेता की दलाली
विश्वसनीय सूत्र बताते हैं कि इस कारोबार में जहां कि खदानों से निकलने वाले कोयले की अधिक मात्रा को एडजस्टमेंट करने के काम के नाम पर अवैध साइडिंग का संचालन किया जा रहा है, उसमें कुछ अधिकारियों के परिजनों की भी भागीदारी है। यह भी बताया गया है कि क्षेत्र के एक युवा नेता के द्वारा इस कोल साइडिंग के स्थानीय कर्ताधर्ता से हर महीने की वसूली फिक्स है और प्रकाशन मैनेजमेंट के नाम पर राशि लेकर इसे संरक्षण दिए हुए हैं। इस युवा नेता से ग्राम वासियों को बड़ी उम्मीदें थी लेकिन उसने अपना कद बढ़ाने के साथ ही जनसमस्याओं को दरकिनार कर संरक्षण देने का काम किया है, जिसे लेकर नाराजगी भी देखी जा रही है। इस युवा नेता की करनी का खामियाजा संबंधित पार्टी को भी आगामी चुनाव में इस क्षेत्र से भुगतना पड़ सकता है।

0 विधायक व सांसद प्रतिनिधि भी कर चुके हैं मांग,फिर खमोश हैं.. क्यों?
अघोषित कोल साइडिंग को बंद करने के लिए आम जनता की परेशानियों को रेखांकित करते हुए रामपुर विधायक पूर्व गृहमंत्री ननकी राम कंवर एवं कोरबा सांसद की प्रतिनिधि श्रीमती धनेश्वरी कंवर के द्वारा भी जिला प्रशासन को पत्र लिखकर मांग की जा चुकी है। इन्होंने भी आंदोलन की चेतावनी दी थी लेकिन बाद में उनकी खामोशी रहस्य का विषय बनी हुई है। जनहित के मुद्दों पर दो कद्दावर जनप्रतिनिधियों का खामोश बैठ जाना कई सवाल खड़े कर रहा है। हालांकि अब जब ग्रामवासियों ने यह मामला उठाया है तो उम्मीद है कि कोई ना कोई हल जरूर निकलेगा, लेकिन प्रशासन के अधिकारियों को इसमें सख्ती दिखानी होगी। ढुलमुल रवैया तो परेशानी का कारण अब तक बना ही है। सोचने वाली बात तो यह है कि शिकायतों के बाद भी यहां प्रशासन और खनिज विभाग के अधिकारियों के कदम अब तक नहीं पड़े हैं, और यदि कभी कोई अधिकारी गया भी होगा तो इसे सार्वजनिक नहीं किया गया है।




