महासमुंद में दो वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी निलंबित…

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महासमुंद(आधार स्तम्भ) :  महासमुंद जिले में उर्वरक वितरण व्यवस्था और निरीक्षण कार्य में लापरवाही के आरोपों के बीच प्रशासन ने दो वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। जिला प्रशासन और कृषि विभाग ने यह कार्रवाई आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 और उर्वरक (नियंत्रण) आदेश 1985 के तहत की गई निगरानी और जांच प्रक्रिया में उदासीनता पाए जाने के बाद की है। जिला प्रशासन के अनुसार वैश्विक स्तर पर उर्वरकों की आपूर्ति स्थिति को देखते हुए किसानों को समय पर और उचित दर पर खाद उपलब्ध कराने के लिए लगातार निरीक्षण और निगरानी की जा रही है।

उप संचालक कृषि एफ.आर. कश्यप ने जानकारी दी कि जिले में उर्वरक की जमाखोरी, कालाबाजारी और अनियमित वितरण की शिकायतों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में हाल ही में शिकायत की पुष्टि होने पर दो वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारियों को निलंबित किया गया है। बताया गया कि जिले में 16 मार्च से 29 मार्च 2026 के बीच फसल उत्पादन की अक्रियाशील अवधि के दौरान कुछ उर्वरक विक्रय केंद्रों द्वारा किसानों को अनियमित रूप से अधिक मात्रा में उर्वरक वितरण किया गया था। इस मामले में 26 उर्वरक विक्रय केंद्रों के लाइसेंस भी निलंबित किए गए हैं। वहीं चार विक्रय केंद्रों पर अत्यधिक मात्रा में उर्वरक बिक्री पाए जाने पर पहले भी कार्रवाई की जा चुकी है, और इनमें से कुछ केंद्रों को पिछले वर्ष 15 दिनों के लिए निलंबित किया गया था।

प्रशासनिक जांच के अनुसार संबंधित उर्वरक विक्रय केंद्रों की स्थिति की सत्यापन प्रक्रिया और रिपोर्टिंग को लेकर बागबाहरा और सरायपाली विकासखंड के दो वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारियों को समय-समय पर निर्देश दिए गए थे। उन्हें समय सीमा की बैठक और विभागीय पत्रों के माध्यम से भी आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन आरोप है कि दोनों अधिकारियों ने चार उर्वरक विक्रय केंद्रों से संबंधित सत्यापन रिपोर्ट समय पर उपलब्ध नहीं कराई और न ही उचित अनुशंसा प्रस्तुत की। प्रशासन का कहना है कि अधिकारियों द्वारा इस मामले में उदासीन रवैया अपनाया गया और आवश्यक कार्रवाई नहीं की गई, जिससे विभागीय कार्य प्रभावित हुआ। इसी आधार पर कलेक्टर ने दोनों वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार निलंबन की कार्रवाई की है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसानों के हितों से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

उप संचालक कृषि ने यह भी बताया कि कुछ वेब पोर्टल्स द्वारा इस कार्रवाई को लेकर गलत और भ्रामक जानकारी प्रसारित की जा रही है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई पूरी जांच और प्रक्रिया के बाद की गई है, जिसमें संबंधित अधिकारियों की भूमिका की समीक्षा की गई थी। जिले में उर्वरक वितरण व्यवस्था को पारदर्शी और नियंत्रित बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि भविष्य में यदि किसी भी स्तर पर कालाबाजारी, जमाखोरी या अनियमितता पाई जाती है, तो संबंधित व्यक्तियों और संस्थाओं पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। कृषि विभाग ने किसानों से भी अपील की है कि वे निर्धारित दरों पर ही उर्वरक खरीदें और किसी भी प्रकार की अनियमितता की सूचना तुरंत प्रशासन को दें।

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