बरपाली (आधार स्तंभ) : वर्तमान में कई सारे पंचायतों में शासकीय भूमि पर कब्जा कर अवैध निर्माण करने की बाढ़ सी आ गई है। जिस पर न तो पंचायत और न ही प्रशासन शिकंजा कस पा रहा है। अगर किसी के द्वारा ऐसे अवैध निर्माण की शिकायत भी की जाती है तो स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा अवैध कब्जाधारियों को संरक्षण देते हुए अधिकारियों को कार्यवाही न करने का दबाव बनाया जाता है।
ऐसा ही एक मामला ग्राम पंचायत बरपाली के वार्ड क्रमांक 11 में देखने को मिला है। जहाँ पर बरपाली निवासी रघुनंदन प्रजापति द्वारा पंचायत की शासकीय भूमि पर अवैध रूप से कब्जा कर मकान निर्माण किया जा रहा है। जिसकी शिकायत तहसीलदार बरपाली के पास किया गया था। तहसीलदार द्वारा इस पर संज्ञान लेते हुए बरपाली पटवारी को जांच अधिकारी नियुक्त कर जांच कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने हेतु निर्देशित किया गया था जिस पर आज जांच अधिकारी (पटवारी) द्वारा जांच किया जाना था।
जनप्रतिनिधि द्वारा जांच अधिकारी को दी गई धमकी
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जांच अधिकारी के रूप में जब बरपाली पटवारी द्वारा जांच के लिए आवेदक व अनावेदक को मौका निरीक्षण हेतु बुलाया गया तब करतला जनपद के एक स्थानीय जनप्रतिनिधि द्वारा फोन करके जाँच अधिकारी पटवारी को निरीक्षण न करने की हिदायत दी गई। जब जाँच अधिकारी द्वारा कहा गया कि मैं अपना काम कर रहा हूँ तो उस जनप्रतिनिधि द्वारा आवेश में आकर धमकी देते हुए यहाँ तक कहा गया कि अगर तुम जाँच करोगे तो अब मैं तुम्हारे पीछे पड़ जाऊंगा।
शिकायत हुई तो बन सकता है मामला
जिस प्रकार से एक जनप्रतिनिधि द्वारा एक शासकीय सेवक जो कि एक जांच अधिकारी भी है उसके ड्यूटी के समय में फोन पर धमकी देते हुए जांच से रोकने का प्रयास किया गया। यदि इस पर उस शासकीय सेवक द्वारा शिकायत की जाती है तो धमकी के साथ साथ शासकीय कार्य में बाधा का मामला भी बन सकता है।
ऐसे जनप्रतिनिधि से जनता की क्या हो सकती है उम्मीद
अब सवाल यह उठता है कि अगर ऐसे अवैध कब्जों पर कार्यवाही करने से जनप्रतिनिधि रोक लगाने लगे तो फिर ऐसे जनप्रतिनिधि से क्षेत्र की जनता क्या उम्मीद कर सकती है? जो जनप्रतिनिधि अवैध कार्यों को संरक्षण देने लगे क्या उनसे विकास कार्यों की उम्मीद की जा सकती है? क्या जनता ने ऐसे अवैध कार्यों के संरक्षण के लिए उस जनप्रतिनिधि को चुना था? यह एक बहुत बड़ा सवाल है।




