रावतपुरा संस्थान के चेयरमैन और कथावाचक श्री रावतपुरा सरकार (रवि शंकर जी महाराज) को फोन टैपिंग मामले में बड़ी राहत,

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छत्तीसगढ़(आधार स्तंभ)  : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल ने श्री रावतपुरा संस्थान के चेयरमैन और कथावाचक श्री रावतपुरा सरकार (रवि शंकर जी महाराज) को फोन टैपिंग मामले में बड़ी राहत दी है। डिवीजन बेंच ने सीबीआई के फोन टैपिंग को पूरी तरह से गैर कानूनी ठहराते हुए रद्द कर दिया है। हाईकोर्ट ने टैपिंग के जरिए हासिल की गई सभी रिकॉर्डिंग्स को नष्ट करने के आदेश दिए हैं। हालांकि, डिवीजन बेंच ने सीबीआई की एफआईआर और चार्जशीट को रद्द करने से इनकार कर दिया है। अब सीबीआई को इस केस को फोन टैपिंग के सबूतों के बिना ही अन्य दस्तावेजों और गवाहों के आधार पर कोर्ट में साबित करना होगा।

सीबीआई ने 30 जून 2025 को देश भर के 35 मेडिकल संस्थानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी, इसमें आरोप था कि स्वास्थ्य मंत्रालय और एनएमसी के अधिकारियों के साथ मिलकर रिश्वत, फर्जी मरीज और घोस्ट फैकल्टी के जरिए मेडिकल कॉलेजों को अपने पक्ष में निरीक्षण रिपोर्ट दिलाई जाती थी। इस मामले में श्री रावतपुरा सरकार इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, रायपुर के चेयरमैन होने के नाते रावतपुरा सरकार को भी आरोपी बनाया गया था। सीबीआई ने रावतपुरा सरकार के खिलाफ 28 जून 2025 को फोन टैपिंग का आदेश जारी किया था। हालांकि, गृह मंत्रालय और दूरसंचार विभाग की ओर से दाखिल हलफनामे में इसे 1 जून 2025 से 31 जुलाई 2025 तक वैध बताया गया। रावतपुरा सरकार ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

हाईकोर्ट ने सीबीआई से पूछा- बैकडेट से कैसे दी मंजूरी हाईकोर्ट ने सीबीआई के शपथपत्र पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि, जब मूल आदेश ही 28 जून को जारी हुआ, तो गृह मंत्रालय 27 दिन पुरानी तारीख से बैकडेट में इसे मंजूरी कैसे दे सकता है? हाईकोर्ट ने पाया कि फोन टैपिंग का आदेश जारी करते समय किसी प्रकार की सार्वजनिक आपातस्थिति या जनसुरक्षा के कारणों का उल्लेख नहीं किया गया था। आदेश केवल औपचारिक तौर पर आदेश पास कर दिया गया था।

फोन टैपिंग किसी व्यक्ति की निजता पर हमला हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि फोन टैपिंग किसी व्यक्ति की निजता पर सीधा हमला है। इसके लिए तय कानूनी प्रक्रिया का कड़ाई से पालन होना अनिवार्य है। हाईकोर्ट ने 28 जून 2025 का सीबीआई का टैपिंग ऑर्डर, 4 जुलाई 2025 का गृह मंत्रालय का पुष्टि आदेश और 15 सितंबर 2025 की रिव्यू कमेटी की कार्यवाही रद्द कर दी है। फोन टैपिंग के बगैर जारी रहेगी सुनवाई इस मामले में हाईकोर्ट ने एफआईआर और चार्जशीट को खारिज नहीं किया है। रायपुर की विशेष सीबीआई अदालत को निर्देश दिया गया है कि वह फोन टैपिंग के सबूतों को पूरी तरह नजरअंदाज कर केवल अन्य वैध सबूतों और गवाहों के आधार पर केस की सुनवाई आगे बढ़ाए।

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