कोरबा(आधार स्तंभ) : जिले के एक सक्रिय पत्रकार वर्षों से जिले और ग्रामीण क्षेत्रों की जनसमस्याओं को समाचारों के माध्यम से शासन-प्रशासन तक पहुंचाते रहे हैं। जनहित के मुद्दों को प्रमुखता से उठाने के कारण लोगों ने उनके कार्य की सराहना भी की है। एक पत्रकार का दायित्व होता है कि वह जनता की समस्याएं और शासन-प्रशासन की कमियों को सामने लाए, और वे यही काम करते आ रहे हैं।
इस पत्रकार ने अपने प्रमुख के निर्देश पर एक विभाग के निर्माण कार्यों से जुड़ी अलग-अलग जानकारियां सूचना का अधिकार (RTI) के तहत मांगी है। उनका कहना है कि उन्हें विभाग से पूरी जानकारी नहीं मिली, इसलिए एक मामले में उन्होंने प्रथम अपील भी की, जिसकी एक सुनवाई हो चुकी है। इसके बाद विभाग के एसडीओ सहित कुछ लोगों द्वारा लगातार समझौता करने और जानकारी नहीं लेने का दबाव बनाया जाने लगा लेकिन पत्रकार ने साफ कहा कि उन्हें किसी तरह का समझौता नहीं, बल्कि सिर्फ जानकारी चाहिए।
पत्रकार के अनुसार, बुधवार रात कुछ लोगों ने उनसे मुलाकात की और एक रेस्ट हाउस में चलने का आग्रह किया। पहले पत्रकार ने देर रात होने की बात कहकर मना किया, लेकिन बार-बार आग्रह करने पर वे वहां पहुंच गए। उनका कहना है कि रेस्ट हाउस में विभाग से जुड़े कुछ ठेकेदार और एसडीओ सहित अन्य लोग मौजूद थे। वहां एक ठेकेदार ने उनसे पूछा कि क्या उन्होंने RTI पैसे उगाही के लिए लगाई है। इस पर पत्रकार ने कहा कि उन्होंने केवल समाचार और निर्माण कार्यों में संभावित लापरवाही की जानकारी के लिए RTI लगाई है। जानकारी देने से बच रहे मौजूद विभाग के एक अधिकारी ने यह तक कहा कि सभी विभागों में ऐसा चलता है, अगर मेरे पेट में लात मरोगे तो मैं तुम्हारे पेट में गोली मारने का दम रखता हूं।
इसके बाद ठेकेदार ने एक कागज पर हस्ताक्षर करने को कहा, जिसमें क्या लिखा था,नहीं पता।पत्रकार ने देर रात हस्ताक्षर करने से इनकार करते हुए कहा कि यदि कोई प्रक्रिया करनी है तो कार्यालय समय में विभागीय अधिकारियों की मौजूदगी में होगी। आरोप है कि इसी बात पर ठेकेदार नाराज हो गया और पत्रकार के कंधे पर हाथ रखकर धमकी दी कि, “इतना मारूंगा कि डॉक्टर भी इलाज नहीं कर पाएगा, या ऐसा गायब करूंगा कि कहीं पता भी नहीं चलेगा। यहां का थाना प्रभारी मेरा दोस्त है बुलाऊ क्या टीआई को। उक्त पत्रकार का कहना है कि उस समय वे अकेले थे, जबकि दूसरी ओर कई लोग मौजूद थे। उन्होंने जवाब दिया कि “चाहे जान से मार दो, लेकिन मैं पीछे नहीं हटूंगा,” और वहां से चले गए।
फिलहाल पत्रकार ने संबंधित ठेकेदार और अन्य लोगों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं। उनका कहना है कि इस घटना के बाद वे खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं और कभी भी उन पर हमला हो सकता है। यह आरोप सही हैं या नहीं और धमकी किसी के इशारे पर दी गई या नहीं, इसका पता जांच के बाद ही चल सकेगा। हालांकि, एक पत्रकार को इस तरह की धमकी का मिलना, भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों को उजागर करने में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।




