कौन सी घुट्टी पिलाई कि, नियमों का पालन कराने आंख मूंद बैठे अधिकारी
कोरबाआधार स्तम्भ) : शहर के टीपी नगर में 7 मार्च को विवादों के मध्य श्रम मंत्री व अन्य के हाथों उद्घाटित“शिवाय हॉस्पिटल” प्रबन्धन ने नियमों को दरकिनार कर अस्पताल का संचालन प्रारम्भ कर दिया है। 100 बिस्तरों वाले अस्पताल के लिए लाइसेंस आवेदन देने के बाद अभी फाइल ठीक से चली ही नहीं है और इधर डॉक्टरों की टीम ने खास कर संचालक डॉक्टर मित्तल ने मरीजों को देखने के साथ-साथ जरूरी जांच करना व प्रिस्क्राइब करना भी शुरू कर दिया है। विभागीय सूत्र बताते हैं कि अस्पताल का उद्घाटन एक अलग प्रक्रिया जिसके लिए अनुमति जरूरी नहीं किन्तु उसकी जाँच और उपचार सेवा शुरू करने के लिए आवश्यक लाइसेंस/संचालन अनुमति का होना अत्यंत जरूरी है। इसके बिना मरीज की जांच तो दूर ओपीडी की पर्ची/पंजीयन भी नहीं कर सकते। आखिर प्रबन्धन की ऐसी कौन सी मजबूरी या हड़बड़ी रही कि उसने लायसेंस प्राप्त करने से पहले ही 5 मार्च से पूजा-अर्चना के बाद ही OPD शुरू कर दिया औऱ दो दिन बाद मंत्री के हाथों औपचारिक उद्घाटन कराया।
अस्पताल संचालन हेतु आवश्यक लाइसेंस के लिए आवेदन 2 मार्च 2026 को स्वास्थ्य विभाग में दिया गया। इसके बाद 3 मार्च को होलिका दहन और 4 मार्च को होली का त्यौहार होने के कारण निश्चित ही अधिकारियों ने ऑनलाइन आवेदन को आगे नहीं बढ़ाया होगा। इतनी भी कोई हड़बड़ी उन्हें महसूस नहीं हुई होगी कि 7 मार्च को शुभारंभ से पहले 5 व 6 मार्च को वह निरीक्षण करने पहुंच जाएं। 7 को शनिवार व 8 मार्च को रविवार का अवकाश के बाद अब जब दफ्तर रूटीन में खुले हैं तो प्रक्रिया आगे बढ़ाने की संभावना है।
गठित किए गए निरीक्षण दल के द्वारा विभिन्न बिंदुओं पर पूरी जांच पड़ताल और सुविधाओं की तसल्ली कर लेने के बाद रिपोर्ट तैयार कर लाइसेंस अनुमति के लिए आगे प्रेषित किया जाएगा। फिर, नियमों के तहत लगभग 1 महीने का समय तो लगना निश्चित है। जब अस्पताल संचालन का लाइसेंस प्राप्त होगा तभी ओपीडी, आईपीडी व अन्य जांच की सुविधा नियमतः दी जा सकेगी, किंतु यहां नियमों के विपरीत ही सारा कुछ खुली आंखों से देखकर भी हो रहा है। मरीज से 400 रुपये शुल्क लिया जाकर जांच के लिए भी लिखा जा रहा है। कई मरीजों को ECG जांच करने के लिए भी लिखा जा रहा है और इसका शुल्क इस अस्पताल में 500 रुपये लिया जा रहा है जबकि मरीज के बताए अनुसार ही इस अस्पताल से बाहर ECG कराने पर उन्हें बमुश्किल 300 रुपए खर्च करना पड़ेगा। इस तरह से नियमों को दरकिनार कर शुरू से ही मनमानी पर यह प्रबंधन उतारू है। देखना होगा कि आने वाले दिनों में नियमों के उल्लंघन पर किस तरह का शिकंजा स्वास्थ्य विभाग/ जिला प्रशासन कसेगा या फिर संरक्षण में रसूख का हवाला देकर अपनी मनमानी चलाता रहेगा।



