कोरबा महाप्रबंधक कार्यालय में बैठक आयोजित, भूविस्थापित बैठक की वार्ता से असंतुष्ट, करेंगे एसईसीएल मुख्यालय का घेराव

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रिपोर्ट : मदन दास

कोरबा(आधार स्तंभ) : एसईसीएल कोरबा क्षेत्र के द्वारा बुडबुड सरायपाली परियोजना हेतु ग्राम बुडबुड सराईपाली के 550 एकड़ भूमि का अर्जन किया गया है। जिसके लिए धारा 4(1) का प्रकाशन 20/5/2005 में किया गया था। जिसका अवार्ड दिनांक 06/09/2007 को किया गया था। अवार्ड की शर्त अनुसार खातेदार को मध्य प्रदेश पुनर्वास नीति 1991 (यथा संशोधित 1995) के तहत रोजगार दिया जाना था। अर्जन की प्रक्रिया के दौरान महाप्रबंधक कोरबा द्वारा अनुविभागीय अधिकारी कटघोरा को लिखित में यह जानकारी उपलब्ध कराई थी, कि 550 एकड़ भूमि के अर्जन में ग्रामीणों को मध्य प्रदेश पुनर्वास नीति के तहत रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। अवार्ड उपरांत दिनांक 15/03/2013 को ग्राम बुडबुड में बैठक आयोजित की गई। बैठक में क्षेत्र के समस्त पंचायत प्रतिनिधि, विधायक राम दयाल उइके, लगभग 400 ग्रामीण, जिला प्रशासन एवं एसईसीएल कोरबा के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में मध्य प्रदेश पुनर्वास नीति के तहत रोजगार देने पर सहमति बनी एवं शीघ्र रोजगार नामांकन जमा करने हेतु कैंप लगाने का निर्देश जारी किया गया। रोजगार पात्रता की जांच एवं पात्रता प्रमाण पत्र प्रदान करते हुए नामांकन पत्र लेकर रोजगार सत्यापन कराई गई। एसईसीएल कोरबा क्षेत्र के द्वारा षडयंत्र पूर्वक कुछ लोगों से सांठ गांठ कर नियम विरुद्ध कोल इंडिया पॉलिसी 2012 को लागू कराया गया। जिसका लिखित में ग्रामीणों ने आपत्ति दर्ज कराई। इसके उपरांत भी प्रबंधन कोल इंडिया पॉलिसी 2012 के तहत रोजगार की प्रक्रिया पुनः प्रारंभ कर दी। इस फैसले से परेशान ग्रामीण वर्षों से प्रबंधन के खिलाफ लड़ रहे हैं।

इसी बिंदु पर आज चर्चा हुई। चर्चा हेतू एसईसीएल मुख्यालय से महाप्रबंधक भू राजस्व श्री शरद तिवारी उपस्थित थे। लंबी चर्चा के उपरांत मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों को इस विषय से अवगत कराने एवम निर्देश प्राप्त कर अग्रिम कार्यवाही करने की बात तिवारी जी के द्वारा कही गई। जिस पर ग्रामिणों ने असंतोष व्यक्त किया। अंबिका परियोजना हेतु ग्राम करतली का आंशिक अधिग्रहण किया गया है, जिस पर ग्रामीणों ने आपत्ति दर्ज कराई एवं संपूर्ण अर्जन करने हेतु कहा गया। इस पर तिवारी जी ने मुख्यालय स्तर पर कार्यवाही चलने की बात बताई गई। रोजगार देने हेतु कोल इंडिया पॉलिसी 2012 लगाए जाने से ग्रामीण नाराज हैं। ग्रामीणों के द्वारा मांग रखी गई की ग्राम के मूल निवासी खातेदार को रोजगार मिले इसके लिए कोल इंडिया पॉलिसी के स्थान पर राज्य की पुनर्वास नीति के तहत रोजगार उपलब्ध कराया जाए। कोल इंडिया पॉलिसी के अनुसार अर्जन पूर्व खरीदे भूमि पर भी रोजगार की पात्रता है। वंशानुगत तरीके से निवासरत छोटे खातेदार रोजगार से वंचित रह जाते हैं। प्रबंधन कोल इंडिया पॉलिसी को छत्तीसगढ़ पुनर्वास नीति से बेहतर बताते हुए मांगों को मान्य नहीं किया गया। पुनर्वास की व्यवस्था प्रबंधन के द्वारा अभी तक नहीं की जा रही है। पुनर्वास हेतु 25 किलोमीटर दूर स्थान चिन्हित किया गया है जिसके कारण भी ग्रामीण नाराज चल रहे हैं । खदान में कार्य करने वाले ड्राइवर हेल्पर को पर्याप्त मजदूरी एचपीसी रेट, मेडिकल, ग्रुप इंश्योरेंस, सुरक्षा उपकरण की सुविधा प्रदान नही करने एवं स्टार एक्स कंपनी के द्वारा छोटी-छोटी बातों पर पेमेंट काटने, कार्य से निकाल देने या पेनल्टी भरने की नोटिस प्रदान करने से ठेका श्रमिक आक्रोशित हैं। ठेका श्रमिकों से महीने में 26 दिन कार्य लेने के बजाय केवल 9–10 दिन ही कार्य में रखा जाता है। इससे परिवार चलाने में परेशानी हो रही है। एरिया पर्सनल मैनेजर को इस पर कार्यवाही करने का निर्देश वरिष्ठ अधिकारियों के द्वारा दिया गया। मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होने से ग्रामीण वार्ता से असंतुष्ट रहे एवं मुख्यालय का घेराव के लिए तैयार हो गए हैं। शीघ्र ही एसईसीएल मुख्यालय बिलासपुर का ग्रामीणों के द्वारा घेराव किया जाएगा। बैठक में प्रबंधन के अधिकारियों के साथ जयपाल सिंह खुसरो, राजकुमार बिंझवार, रामरतन श्याम, प्रताप सिंह, ब्रजेश श्रीवास, गजेंद्र सिंह, संतोष राठौर, दिलहरन दास, बजरंग सोनी, शंकर सिंह टेकाम, रामदुलारी जगत, टी पी सोनी, शिवनारायण पोर्ते, हेमलाल , रिंकु, संतोष श्रीवास, अशोक यादव, कमलेश डिक्सेना, खिक लाल यादव, रवि नायक, परमेश्वर बिंझवार, अजीत मरावी उपस्थित रहे।

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