विराट सराफ अपहरण कांड : हाईकोर्ट ने किडनैपर्स की अपील की खारिज, उम्रकैद की सजा बरकरार

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बिलासपुर (आधार स्तम्भ) : बिलासपुर के चर्चित मासूम विराट सराफ अपहरण कांड के आरोपियों की सजा के खिलाफ पेश की गई अपील को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविन्द्र कुमार अग्रवाल की युगलपीठ ने कहा कि फिरौती के लिए किडनैपिंग, क्रिमिनल साजिश, नाबालिग बच्चे, IPC की धारा 364-A और 120-B के तहत सजा, जुर्म का सबूत — सरकारी वकील ने यह साबित कर दिया कि आरोपियों ने क्रिमिनल साजिश को आगे बढ़ाते हुए फिरौती के लिए नाबालिग बच्चे को किडनैप किया। जबकि जुर्म पक्के और भरोसेमंद मौखिक सबूत, पहचान पत्र, इलेक्ट्रॉनिक सबूत जिसमें कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और साइबर एनालिसिस रिपोर्ट शामिल हैं, इससे साबित हुआ, जो आरोपियों के जुर्म की कड़ियों को जोड़ते थे। किडनैपिंग और फिरौती की मांग को पूरा करने में आरोपियों की पहले से मिली-जुली सोच और मिलकर किए गए काम IPC की धारा 120-B के तहत क्रिमिनल साजिश का आरोप साबित करते हैं। बता दें कि 20 अप्रैल 2019 को कश्यप कॉलोनी निवासी व्यापारी विवेक सराफ का पुत्र विराट सराफ घर के पास अपने दोस्तों के साथ खेल रहा था।

आरोपी अनिल सिंह बच्चे का मुंह बंद कर वैगन-R कार, रजिस्ट्रेशन नंबर CG 10 AM 2818 में लेकर गए। आरोपी हरेकृष्ण ने पीड़ित विराट को अपने दोस्तों में पहचाना, जिनके साथ वह खेल रहा था और उसके बाद उन्होंने उसका मुंह बंद कर दिया और उसे कार से किडनैप कर लिया। वे पुराने बस स्टैंड, शिव टॉकीज चौक और तारबाहर चौक होते हुए रेलवे स्टेशन, बिलासपुर की ओर बढ़े। अपने प्लान के मुताबिक, अपील करने वाला अनिल सिंह, राजकिशोर सिंह की दूसरी डस्टर कार, जिसका रजिस्ट्रेशन नंबर CG 04 KR 5232 था, उसमें रेलवे स्टेशन, बिलासपुर के पास मौजूद था। उन्होंने पीड़ित विराट को वैगन-R कार से डस्टर कार में बिठाया और उसे पन्ना नगर, जरहाभाटा, बिलासपुर में राजकिशोर सिंह के घर ले गए। उन्होंने उसके हाथ-पैर बांध दिए और उसे एक कमरे में बंद कर दिया। हरेकृष्ण ने पीड़ित विराट की आवाज में फिरौती की मांग अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड कर ली। बच्चे की सलामती चाहने की बात कहते हुए 6 करोड़ की मांग की गई थी। सिटी कोतवाली पुलिस ने मामला दर्ज किया। शहर भर में नाकेबंदी की गई। जगह-जगह के सीसीटीवी फुटेज देखे गए। मोबाइल नंबर व अन्य साक्ष्य की जांच के बाद पुलिस बच्चे के अपहरण कराने की मास्टरमाइंड बड़ी मां नीता सराफ तक पहुंची। इसके बाद बच्चे को पन्ना नगर, जरहाभाटा के मकान से बरामद किया गया।

इस मामले में पुलिस ने आरोपी नीता सराफ, राजकिशोर, अनिल, सतीश, हरेकृष्ण कुमार को गिरफ्तार कर न्यायालय में चालान पेश किया। विचारण न्यायालय ने सभी आरोपियों को दोषसिद्धि की सजा IPC की धारा 120-B के तहत 14 साल की सजा और 10,000 रुपये का जुर्माना, जुर्माना न देने पर 1 साल की अतिरिक्त सज़ा। IPC की धारा 363/120-B के तहत 7 साल की सजा और 10,000 रुपये का जुर्माना, जुर्माना न देने पर 1 साल की अतिरिक्त सज़ा। सेक्शन 364-A/120-B के तहत उम्रकैद और 25,000 रुपये का जुर्माना, जुर्माना न देने पर 3 साल के लिए अतिरिक्त R.I.। सेक्शन 365/120-B IPC के तहत 7 साल की कठोर कैद और 10,000 रुपये का जुर्माना। सेक्शन 368/120-B IPC के तहत 7 साल की कठोर कैद और 10,000 रुपये का जुर्माना, जुर्माना न देने पर 1 साल के लिए अतिरिक्त सजा। सभी सजाएं एक साथ चलने का निर्देश दिया गया।

इस सजा के खिलाफ आरोपियों ने हाईकोर्ट में अपील पेश की। हाईकोर्ट ने आरोपियों की सजा को यथावत रखते हुए अपील खारिज किया है। कोर्ट ने कहा कि प्रॉसिक्यूशन द्वारा साबित किए गए हालात की पूरी चेन से, यानी आरोपियों के बीच मकसद और पहले की साजिश, वैगन-R गाड़ी में बच्चे को किडनैप करना, गाड़ी की मूवमेंट को कन्फर्म करने वाला CCTV फुटेज, पीड़ित और दूसरे गवाहों द्वारा आरोपियों की पहचान, आरोपी राजकिशोर सिंह के घर से पीड़ित की रिकवरी, आरोपियों से अपराध साबित करने वाली चीज़ों की रिकवरी, इलेक्ट्रॉनिक सबूत जिसमें CDRs, टावर लोकेशन, IMEI लिंकेज और इंटरसेप्ट की गई बातचीत शामिल हैं, साइंटिफिक सबूत जिसमें फिंगरप्रिंट जांच और फोरेंसिक एनालिसिस शामिल है और घटना से पहले और बाद में आरोपियों का व्यवहार — एक पूरी और बिना टूटी चेन बनी है, जो सिर्फ आरोपियों के गुनाह की ओर इशारा करती है और बेगुनाही की हर हाइपोथिसिस को बाहर करती है

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