कुलदीप चौहान, रायगढ़
तमनार(आधार स्तंभ) : तमनार ब्लॉक के मुड़ागांव में फारेस्ट जंगल की जमीन पर पेड़ काटने को लेकर काफी दिनों से चल रहा लड़ाई झगड़ा अब आखिरकार खत्म का गया है। गांव वालों के आंदोलन के बाद अडानी अम्बानी कंपनी और महाजेनको (MAHAJENCO) ने मिलकर गांव वालों को 7 करोड़ का मुआवजा रजिस्टरड चेक के जरिए दिया है। गांव वालों का कहना है कि छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि भारत देश में पहली बार ऐसा हुआ है कि जंगल से मिलने वाले वनोपज के बदले बड़ा मुआवजा मिला है।
मुड़ागांव के लोग सालों से जंगल पर ही जी रहे हैं। तेंदूपत्ता तोड़ना, महुआ बीनना, बनाना चिरौंजी इकट्ठा करना ही घर चलाने का सहारा रहा है। जब से जंगल में पेड़ काटना शुरू हुआ, तब से गांव वालों को डर लगने लगा कि अब रोज़ी-रोटी कैसे चलेगी। इसी बात को लेकर गांव के सब लोग एक हो गए और आंदोलन रूपी संघर्ष शुरू कर दिए।
आंदोलन में कई संगठन और नेता आए-गए, लेकिन गांव वालों का कहना है कि सराईटोला के सरपंच अमृत लाल भगत और उपसरपंच तुला राम राठिया आखिरी तक गांव वालों के साथ डटे रहे और उन्हीं की वजह से यहाँ बात बनी।
गांव वालों ने साफ कहा कि जंगल से मिलने वाली पूरी कमाई पर उनका हक अधिकार है। बिना पूछे और बिना मुआवजा दिए पेड़ काटना बिल्कुल गलत है। इसी मांग को लेकर धरना प्रदर्शन दिया गया, नारे लगाए लगे और अफसरों से कई बार बहस भी हुई।
काफी बात और प्रशासन की समझाने के बाद अडानी और महाजेको वालों ने गांव वालों की बात मान ही ली। जंगल से होने वाले नुकसान के बदले 7 करोड़ रुपये मात्र देने पर राजी हुए और तय तरीके से कई चेक बांटे गए।
पैसा मिलने के बाद गांव में फूल खुशी का माहौल है। लोग कह रहे हैं कि यह उनकी एकता और लड़ाई झगड़े की जीत है। वहीं अफसरों का भी कहना है कि बातचीत से ही ऐसे मामले सुलझाए सकते हैं।
मुड़ागांव की यह लड़ाई अब आसपास के गाँव, देश के लिए मिसाल बन गई है। गांव वालों का कहना है कि अगर सब एक होकर अपनी बात रखें, तो न्याय जरूर मिलता है।



