बिलासपुर आरटीओ ऑफिस दलालों का अड्डा, अधिकारियों की मिलीभगत से जारी गोरखधंधा

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बिलासपुर (आधार स्तंभ) : लगरा स्थित क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) में भ्रष्टाचार और दलाली का खेल खुलेआम चल रहा है। खबर छत्तीसगढ़ की टीम ने मौके पर जांच पड़ताल की, जिसमें चौंकाने वाली हकीकत सामने आई।

ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए आम जनता को दलालों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार, 3 से 5 ब्रोकर सक्रिय हैं जो टू-व्हीलर और फोर-व्हीलर का लाइसेंस बनवाने के नाम पर गरीबों से मोटी रकम वसूलते हैं। कहा जा रहा है कि इन दलालों के जरिए ही अधिकारियों की जेब भी गर्म होती है। जिनके पास पैसा है, उनका लाइसेंस जल्दी तैयार हो जाता है, जबकि गरीब लोग हफ्तों तक चक्कर काटते रहते हैं।

वर्तमान में क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (RTO) के पद पर असीम माथुर की नियुक्ति है। लेकिन वे एक साथ बिलासपुर और मुंगेली दोनों जिलों का कार्यभार संभाल रहे हैं। इस वजह से बिलासपुर के आवेदकों को अक्सर ऑफिस में अधिकारियों से मिलने में परेशानी होती है। जब माथुर मुंगेली में रहते हैं तो बिलासपुर का कामकाज ठप पड़ जाता है।

दूसरी ओर, परिवहन कार्यालय में लाखों की लागत से खरीदी गई फाइलें और रिकॉर्ड धूल खा रहे हैं। रखरखाव और मेंटेनेंस पर हर साल बड़ी रकम खर्च होने के बावजूद फाइलों का सही ढंग से संधारण नहीं हो रहा। इससे विभागीय कामकाज प्रभावित हो रहा है और आवेदकों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।

आरटीओ कार्यालय की यह हालत साफ तौर पर भ्रष्टाचार और लापरवाही की ओर इशारा करती है। सवाल यह उठता है कि आखिर कब तक गरीब जनता दलालों और अफसरों की मिलीभगत का शिकार होती रहेगी?

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