गेवरा खदान में भू-विस्थापित श्रमिकों का हल्ला बोल, छह घंटे कामकाज ठप

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अजय जायसवाल के नेतृत्व में विभिन्न मांगों को लेकर धरने पर बैठे श्रमिक, 29 अक्टूबर को SECL प्रबंधन के साथ होगी वार्ता

गेवरा/कोरबा(आधार स्तंभ) : एक ओर SECL बिलासपुर के CMD गेवरा खदान के दौरे पर रहे, वहीं दूसरी ओर खदान में कार्यरत भू-विस्थापित श्रमिकों और स्थानीय बेरोजगारों की विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन शुरू हो गया। पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष कोरबा अजय जायसवाल के नेतृत्व में श्रमिक खदान में धरने पर बैठ गए। आंदोलन के दौरान करीब छह घंटे तक कामकाज ठप रहा। इसके बाद SECL प्रबंधन और निजी ठेका कंपनी PNC के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर श्रमिकों से चर्चा की तथा उनकी मांगों पर वार्ता करने का आश्वासन दिया।

छह महीने से मांगों को लेकर कर रहे थे पत्राचार

जानकारी के अनुसार, गेवरा खदान में कार्यरत निजी ठेका कंपनी PNC सहित अन्य कंपनियों के भू-विस्थापित श्रमिक पिछले कई महीनों से अपनी मांगों को लेकर प्रबंधन और संबंधित कंपनियों से पत्राचार कर रहे थे। श्रमिकों का आरोप है कि छह महीने से हाई पावर कमेटी के अनुसार वेतन भुगतान, भविष्य निधि (PF), सुरक्षा व्यवस्था, बोनस, वेतन पर्ची और जॉइनिंग लेटर जैसी बुनियादी सुविधाओं की मांग की जा रही थी। इसके अलावा पिछले दो महीने से भुगतान लंबित होने का मुद्दा भी उठाया गया, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ।

लगातार अनदेखी से नाराज श्रमिकों ने पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष अजय जायसवाल को अपनी समस्याओं से अवगत कराया। इसके बाद जायसवाल श्रमिकों के साथ गेवरा खदान पहुंचे और उनकी मांगों के समर्थन में धरने पर बैठ गए। देखते ही देखते आंदोलन तेज हो गया और श्रमिकों ने करीब छह घंटे तक काम बंद कर अपना विरोध दर्ज कराया।

प्रबंधन और कंपनी के अधिकारियों ने की चर्चा

आंदोलन की जानकारी मिलने के बाद SECL प्रबंधन और PNC कंपनी के अधिकारी वार्ता के लिए पहुंचे। अधिकारियों ने श्रमिकों से हड़ताल स्थगित करने का आग्रह किया। इसके बाद 29 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12 बजे SECL गेवरा के CGM कार्यालय में बैठक आयोजित कर विभिन्न मांगों पर चर्चा करने और उनके निराकरण की दिशा में कार्रवाई करने का आश्वासन दिया गया। इसी सहमति के बाद आंदोलन स्थगित करने पर सहमति बनी।

इन प्रमुख मांगों पर होगी चर्चा

श्रमिकों की ओर से प्रमुख रूप से निम्नलिखित मांगें रखी गईं—

  1. सभी श्रमिकों को हाई पावर कमेटी के अनुसार वेतन का भुगतान।
  2. सभी श्रमिकों को पहचान पत्र (ID कार्ड) उपलब्ध कराने और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग।
  3. प्रत्येक श्रमिक को वेतन पर्ची (पेमेंट स्लिप) प्रदान करना।
  4. स्थानीय बेरोजगारों को रोजगार उपलब्ध कराना।
  5. सभी श्रमिकों को जॉइनिंग लेटर देना।
  6. बोनस का भुगतान तथा पिछले दो महीने से लंबित वेतन का निराकरण।

अब सभी की निगाहें 29 अक्टूबर को होने वाली बैठक पर टिकी हैं। श्रमिकों को उम्मीद है कि इस वार्ता में उनकी लंबे समय से लंबित समस्याओं का ठोस समाधान निकलेगा।

आंदोलन में जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों की रही मौजूदगी

धरना-प्रदर्शन में भू-विस्थापित श्रमिकों के साथ अजय जायसवाल पूर्व उपाध्यक्ष जिला पंचायत कोरबा; शेत मसीह, सांसद प्रतिनिधि; मधुसूदन दास, नेता प्रतिपक्ष बांकी मोंगरा; गोविंदा सारथी, कमलेश प्रजापति, संतोष यादव, प्रकाश सागर, फिरोज, राजकुमार पटवा, राकेश राजपूत, संजय यादव, सुजीत महंत, गौरव साहू और अनिल सागर सहित कंपनी में कार्यरत हेल्पर, ड्राइवर तथा आसपास के ग्रामीण बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

श्रमिकों का कहना है कि वे अपनी जायज मांगों के निराकरण की उम्मीद कर रहे हैं। अब देखना होगा कि SECL प्रबंधन और संबंधित कंपनियां बैठक में किए गए आश्वासनों को किस हद तक अमल में लाती हैं।

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