वार्ड क्रमांक 12 को छोड़कर बाकी वार्डों में रोशनी, आखिर सिंचाई कॉलोनी के लोगों का क्या दोष?
बरपाली(आधार स्तंभ) : नवरात्रि जैसे पावन पर्व पर जहां गांव के अन्य वार्ड रोशनी से जगमगाते रहे, वहीं सिंचाई कॉलोनी स्थित वार्ड क्रमांक 12 अंधेरे में डूबा रहा। इस स्थिति को लेकर ग्राम पंचायत बरपाली की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि वार्ड क्रमांक 12 को छोड़कर अन्य वार्डों में रोशनी की व्यवस्था की गई, लेकिन इस वार्ड को नजरअंदाज कर दिया गया।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या वार्ड क्रमांक 12 के लोगों ने सरपंच पद के लिए वोट नहीं दिया था? यदि वार्ड के पंच और सरपंच के बीच किसी तरह का मतभेद है, तो उसका खामियाजा आम जनता क्यों भुगते? चुनाव में हर वार्ड के मतदाताओं की भूमिका होती है। ऐसे में किसी जनप्रतिनिधि से कथित विरोध के कारण पूरे वार्ड की जनता को सुविधाओं से वंचित होना पड़े, तो यह पंचायत की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है।
पंच से विरोध तो जनता क्यों भुगते खामियाजा?
नवरात्रि के दौरान गांव के अन्य वार्डों में रोशनी और सिंचाई कॉलोनी के वार्ड क्रमांक 12 में अंधेरा होने की स्थिति ने स्थानीय लोगों के मन में भेदभाव की आशंका पैदा की है। आखिर ऐसा क्या कारण रहा कि इस वार्ड में रोशनी की व्यवस्था नहीं हो सकी? क्या पंचायत के पास पर्याप्त संसाधन नहीं थे, या फिर इस वार्ड को सिर्फ इसलिए छोड़ दिया गया कि वार्ड के पंच के साथ सरपंच का तालमेल नहीं बैठ पा रहा है? अगर ऐसा है तो वार्ड 12 सिंचाई कॉलोनी की जनता इसका खामियाजा क्यों भुगते? इसका जवाब पंचायत को सार्वजनिक करना चाहिए।
जनता का सवाल साफ है—वोट मांगते समय हर वार्ड अपना होता है, तो सुविधाएं देते समय भेदभाव क्यों? पंच और सरपंच के बीच मतभेद हो सकते हैं, लेकिन पंचायत की सुविधाएं किसी व्यक्तिगत संबंध या राजनीतिक खींचतान के आधार पर नहीं, बल्कि जनता की जरूरतों के अनुसार मिलनी चाहिए।
अब देखना यह है कि ग्राम पंचायत बरपाली के सरपंच इस मामले में अपना पक्ष रखते हैं या नहीं और वार्ड क्रमांक 12 के लोगों को इस कथित उपेक्षा का जवाब कब मिलता है। आखिर वार्ड 12 की जनता का भी उतना ही अधिकार है, जितना गांव के अन्य वार्डों के लोगों का।




