अंधेरी सड़कों पर आए दिन हो रहे हादसे,पर नींद नहीं खुल रही अधिकारियों की

Must Read

 

कोरबा(आधार स्तम्भ) :  कटघोरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत हुए दो दर्दनाक सड़क हादसों में ‘अंधेरा’ जानलेवा साबित हुआ। अंधेरी सड़कों पर आए दिन हो रहे हादसे,पर नींद नहीं खुल रही अधिकारियों की।​लगातार शिकायतों के बाद भी प्रशासन मौन।

पहली घटना :-

सीताराम चौक चकचकवा पहाड़ के पास हुई। ऐतमानगर निवासी शिपाल पोर्ते पिता तीज राम पोर्ते 25 वर्ष अपनी बाइक से ग्राम सिंघिया से वापस ऐतमानगर जा रहा था। मार्ग पर स्ट्रीट लाइटें बंद थीं और सड़क पर मुरूम का ढेर पड़ा हुआ था। अंधेरे के कारण शिपाल को यह ढेर नजर नहीं आया और उसकी बाइक सीधे मुरूम पर चढ़कर पलट गई। सिर पर गंभीर चोट लगने के कारण अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही युवक ने दम तोड़ दिया। परिजनों का कहना है कि अगर लाइटें चालू होतीं, तो यह हादसा टाला जा सकता था।

दूसरी घटना :-

तानाखार बरपाली के पास घटित हुई। पोड़ी उपरोड़ा में पदस्थ शिक्षक जय पांडेय अपनी कार से किसी कार्यवश कटघोरा आए थे। शुक्रवार शाम को बाजार से सब्जी लेकर वापस लौटते समय अंधेरे मार्ग में तानाखार के पास उनकी कार अचानक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे एक पेड़ से जा टकराई।राहगीरों की मदद से उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कटघोरा लाया गया, जहाँ नाजुक स्थिति को देखते हुए उन्हें NKH कोरबा रेफर किया गया। यहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। काफी मृदुभाषी,सरल और मिलनसार शिक्षक जय पांडेय के निधन की खबर से शोक की लहर दौड़ पड़ी है। वे वर्तमान में संकुल प्रभारी का भी दायित्व निर्वहन कर रहे थे।

लगातार शिकायतों के बाद भी प्रशासन मौन

​कटघोरा से चंदनपुर और चकचकवा पहाड़ तक एनएच मार्ग पर स्ट्रीट लाइटें तो लगाई गई हैं, लेकिन रखरखाव के अभाव में वे शो-पीस बनी हुई हैं। ग्रामीणों और राहगीरों ने पूर्व में भी इसकी शिकायत विभाग से की थी, लेकिन लाइटें चालू नहीं की गईं। कटघोरा-पोड़ी मुख्य मार्ग पर बढ़ते हादसे अब सिस्टम की लापरवाही की गवाही दे रहे हैं। इन दोनों ही मामलों में पुलिस ने जांच शुरू कर दी है, लेकिन स्थानीय लोगों में एनएच विभाग के प्रति भारी आक्रोश व्याप्त है।

आखिर कब तय होगी जिम्मेदारी…?

 

आवागमन की प्रमुख सड़कों पर गड्ढे और अंधेरे,बिना संकेतक और बिना गति अवरोधक वाले तीखे,अंधे मोड़ के कारण होने वाले हादसे और जनहानि सीधे तौर पर प्रशासन व सम्बंधित सड़क विभाग की लापरवाही होती है। ऐसी लापरवाहियों के कारण कई जिन्दगी खत्म हो रही है किंतु गैर जिम्मेदार लोगों पर जिम्मेदारी तय नहीं होने के कारण न तो व्यवस्था सुधारी जा रही है और न ही दुर्घटनाओं का आंकड़ा कम हो रहा है। जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही घरों का चिराग व सहारा छीन रही है,पर कानून के शिकंजे से गैर जिम्मेदार प्रशासन व विभागीय अधिकारी बचते आये हैं। सरकारें सिर्फ ऐलान करती हैं कि खराब सड़कों के कारण होने वाले हादसों के लिए अधिकारी जिम्मेदार होंगे, लेकिन आज तक ऐसी किसी मौत के लिए किसी अधिकारी को दण्ड नहीं मिला है।नेशनल हाईवे अथॉरिटी के अधिकारियों की ऐसी लापरवाही/उदासीनता/अनदेखी/कर्तव्यहीनता भी मौतों के लिए जिम्मेदार है।

Latest News

तड़पता रहा घायल,108पहुंची न समय पर 112, हुई दर्दनाक मौत

3 घण्टे लग गए आने में,ग्रामीण बोले-इतने समय में तो दशगात्र हो जाता है…! ग्रामीण अंचलों में जान पर भारी...

More Articles Like This

- Advertisement -