पुलिस कप्तान को मुगालते में रख रहे कुछ थानेदार और मैदानी अमला
कोरबा(आधार स्तम्भ) : जिले में सरकारी संपत्तियों और कीमती स्क्रैप तथा कबाड़ सामानों की चोरी कर उसे फर्जी बिल, फर्जी जीएसटी के सहारे एक नंबर का धंधा बता कर कार्य करने वाले कुछ लोगों पर शिकंजा कसे जाने के बाद ऐसा लग रहा है कि मानो सब कुछ ठीक हो गया हो। जिला पुलिस अधीक्षक को कुछ इसी तरह के मुगालते में रखकर कुछ थानेदार और उनके अधीनस्थ मैदानी अमला सिंडिकेट में छोटे पैमाने पर किंतु चोरी और अवैध का माल खपा रहे लोगों को संरक्षण दिए हुए हैं। चर्चित कबाड़ी मुकेश और करीब 17 लोगों को सरकारी लोहा पुल चोरी के मामले में गिरफ्तार कर जेल भेज दिए जाने के बाद उसके लोग इस कार्य को बखूबी अंजाम दे रहे हैं। विश्वसनीय और पुष्ट सूत्रों से जो जानकारी मिली है उसके मुताबिक इनका चैनल कोरबा से लेकर पड़ोसी जिला जांजगीर-चाम्पा और रायगढ़ तक काफी एक्टिव है। इनकी छोटी गाड़ियों को निकलवाने का काम थानों की सरहदों से यहीं के आरक्षक स्तर के स्टाफ के जरिए हो रहा है। सूत्र बताते हैं कि शहर क्षेत्र के एक महत्वपूर्ण थाना का आरक्षक उनके लिए मजबूत मुखबिर की भूमिका निभा रहा है और वह काफी लंबे समय से सक्रिय है जिसके कारण राताखार में बड़े पैमाने पर यह कारोबार बेखौफ चल रहा था। कबाड़ी के नए-नए अड्डों के बारे में किसी को जानकारी भी नहीं थी लेकिन इस आरक्षक को सब कुछ पता है।
फिलहाल वर्तमान में जो जानकारी निकलकर सामने आ रही है उसके मुताबिक राजेश के संरक्षण में वसीम, विमलेश और सुभाष अलग-अलग इलाकों में फैल कर अवैध लोहा, तांबा, अल्युमिनियम और कीमती स्क्रैप छोटे पैमाने पर इकट्ठा करके नए ठिकाने पर डंप करते हैं और इसके बाद एक स्थान से छोटे मालवाहन में भर कर दो प्रमुख थाना क्षेत्र से गुजरते हुए चांपा जिले की सीमा में प्रवेश करते हैं और यहां एक बड़े उद्योग इकाई से निकलने वाले चोरी के स्क्रेप में मिलाकर बड़े कबाड़ी के पास रायगढ़ में खपा देते हैं। यह सारा कुछ सिलसिलेवार चल रहा है लेकिन बड़े ही सधे हुए तरीके से ताकि कप्तान तक भनक ना पहुंच सके। कप्तान तक बात पहुंची तो नि:संदेह इनकी खैर नहीं। वैसे साइबर सेल में बदलाव के बाद इस इकाई में काम करने वाले तेजतर्रार खिलाड़ियों को इस अवैध कबाड़ की भनक न हो, यह संभव नजर नहीं आता। प्रभारी तो अभी नए-नए हैं उन्हें काफी कुछ सीखना और समझना होगा।
जिले के दूसरे छोर में भी एक्टिविटी
कोरबा जिले के इस छोर में जहां सिंडिकेट सक्रिय है तो दूसरा छोर में भी चंद कबाड़ियों की एक्टिविटी है। इसमें एक छुरी का नामचीन और कारखाना एरिया का बड़ा कबाड़ी शामिल बताए जाते हैं। बिना अवैध कबाड़ के धंधे में उतरे इन्हें चैन नहीं। छुरी का कबाड़ी तो तांबा पर ज्यादा ध्यान देता है, और बड़ा कबड्डी कारखाना एरिया से होते हुए माल को भीतर के रास्ते से निकलकर रायगढ़,रायपुर तक पहुंचा आता है। सूत्र बताते हैं कि कुछ बंद पड़े ठिकाने इनके लिए सुरक्षित अड्डा के तौर पर काम आते हैं। यह बड़ा ही रहस्यमयी संयोग है कि ऐसे लोगों के ठिकानों पर/उनकी गतिविधियों पर निगरानीशुदा बदमाशों की तरह ना तो कोई निगरानी होती है, न ही परेड और ना ही कोई चेकिंग। थानों में मौजूद मंझे हुए खिलाड़ियों का जब इन्हें साथ मिल रहा हो तो कुछ मामलों में बड़े अधिकारी धोखा खा जाएं, तो कोई बड़ी बात नहीं।



