3 मौतों का रहस्य..! क्या किसी साजिश का शिकार हुए तीनों या तंत्र साधना में चूक हुई…? IG पोहुंचे घटनास्थल पर

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कोरबा(आधार स्तंभ) :  कोरबा के स्क्रैप कारोबारी अशरफ मेमन सहित तीन लोगों की एक कमरे में संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के तार भले ही तंत्र-मंत्र से जोड़े जा रहे हैं लेकिन इस पर एकबारगी जल्द ही किसी को विश्वास भी नहीं हो रहा। शहर सहित जिला और दूसरे जिलों में जो अशरफ को करीब से जानते हैं, वह इस बात पर यकीन नहीं कर पा रहे हैं कि वह किसी ऐसे तंत्र-मंत्र के जाल में उलझा होगा? हालांकि, उसमें यह जानने की जिज्ञासा जरूर रहती थी कि क्या ऐसा कुछ होता भी है। घटनाक्रम में किसी साजिश की आशंका से इनकार नहीं किया जा रहा लेकिन जब तक सारे तथ्य और घटना से जुड़ी कड़ियां एक सूत्र में पिरोए नहीं जाएंगे, तब तक कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। पुलिस इस मामले में तहकीकात कर रही है। बिलासपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक डॉ. संजीव शुक्ला भी कोरबा प्रवास पर आए और उन्होंने घटना स्थल फार्म हाउस का निरीक्षण किया। जांच के संबंध में एसपी सिद्धार्थ तिवारी से जानकारी लेते हुए आवश्यक मार्गदर्शन भी दिए।

शहर से लगे बरबसपुर में कुदरी स्थित अशरफ मेमन के फार्म हाउस के कमरे में बुधवार की शाम से लेकर रात 10 बजे तक ऐसा क्या हुआ कि एक-एक कर तीन लोगों की मौत बैगा की नजरों के सामने हो गई। घटनाक्रम सुनने और समझने में सीधा-सीधा लग रहा है लेकिन यकीन से फिलहाल दूर है। जो बातें अब तक सामने आई है, उसके मुताबिक झरन विधि करने के लिए बिलासपुर जिले से राजेंद्र नामक बैगा, एक वृद्ध सहित अपने चार साथियों के साथ कोरबा आया था। बुधवार सुबह 11 बजे यह लोग बिलासपुर से निकले और शाम 4 बजे तक कोरबा पहुंचे। इसके बाद इन सभी को फार्म हाउस ले जाया गया। यहां पर चार लोग एक कमरे के बाहर बैठे थे। कमरे के भीतर बैगा अपनी झरन विधि हेतु तंत्र क्रिया कर रहा था। उसने सबसे पहले किसी एक व्यक्ति को भीतर बुलाया और उससे करीब 10 मिनट चर्चा की। इसके बाद दुर्ग से आए एक कारोबारी नीतीश को बुलाया। इसके लगभग 10 मिनट के बाद सुरेश और फिर 10 मिनट के बाद अशरफ को भीतर बुलाया। इन तीनों को भीतर बुलाने के काफी देर बाद तक जब कोई भी बाहर नहीं निकला तो बाहर मौजूद बैगा के साथी ने इन लोगों को बाहर निकालने के लिए सवाल-जवाब किया तो 10 मिनट, आधा घंटा करते-करते काफी वक्त बैगा ने लगा दिया।

शाम लगभग 7 बजे जब बाहर बैठे लोग कमरे में घुसे तो वहां तीनों बेहोशी की हालत में नजर आए। बैगा से सवाल करने पर कहा कि मंत्र फूंका हूं, थोड़ी देर में होश आ जाएगा। उसे कहा गया कि इनकी तबीयत खराब हो गई है तो तत्काल अस्पताल ले जाया जाए लेकिन अब-तब में होश आने की बात करते-करते रात 10 बजा दिया गया। तब तक काफी देर हो चुकी थी। यहां मौजूद अन्य लोगों ने अपना गुस्सा उतारा। आनन-फानन में बेहोश पड़े तीनों लोगों को कोरबा के अस्पताल लाया गया। मृत हालत में यह तीनों यहां लाए गए थे जिन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। रात लगभग 12 बजे पुलिस को। अस्पताल से 3 मौतों की खबर पता चलते ही अधिकारी हरकत में आये।

👉🏻…रस्सी जितना कसोगे उतना ज्यादा पैसा मिलेगा

सूत्रों द्वारा बताया जा रहा है कि झरन विधि के दौरान नींबू और नायलॉन की रस्सी का इस्तेमाल किया गया। गले में नींबू फंसा कर नायलॉन की रस्सी से खींचने की बात कह कर जितना ज्यादा खींचेंगे, उतना ज्यादा पैसा आएगा इस बात का झांसा दिया जाता रहा। प्रथम दृष्टया ऐसा माना जा रहा है कि इसी विधि के दौरान सांस की नली टूट जाने से जान चली गई। लेकिन, यह बात समझ से परे है कि जब एक व्यक्ति कमरे में बेहोश मिला तो बुलावे पर गया दूसरा व्यक्ति और दूसरे व्यक्ति के बेहोश होने के बाद बुलावे पर गए तीसरे व्यक्ति ने इन सबको नजरअंदाज क्यों किया?

👉🏻 साजिश से इंकार नहीं

चर्चाओं में इस बात की भी आशंका और संभावना जताई जा रही है कि हो ना हो यह किसी अनजान साजिश का हिस्सा था। इन्हें पीने के लिए कोई पदार्थ दिया गया था जिसका सेवन बैगा ने नहीं किया, इसलिए वह सुरक्षित बचा रहा जबकि सेवन करने वाले तीनों लोग बेहोश होकर मृत्यु को प्राप्त हो गए। घटनाक्रम से जुड़ी कई तरह की बातें सामने आ रही हैं। पुलिस ने संदेह के आधार पर कुछ लोगों को हिरासत में लिया है। आपसी रंजिश को भी जांच का एंगल बनाया गया है। बहरहाल इस पूरे घटनाक्रम के रहस्य से पर्दा उठने का इंतजार न सिर्फ मृतक अशरफ मेमन, सुरेश साहू और नीतीश कुमार के परिजनों को है, बल्कि शहर और जिलावासी भी जानना चाह रहे हैं कि आखिर उस कमरे में ऐसा क्या हुआ था कि इन तीनों को एक साथ जान से हाथ धोना पड़ा।

👉🏻 अंधविश्वास नहीं,यथार्थ पर हो विश्वास

इस तरह के तंत्र-मंत्र विधि, झरन विधि से रूपये को कई गुणा करने का झांसा, गड़ा धन खोज कर निकालने की विधि जैसे बातों से लोगों को सावधान रहने की जरूरत है। अंधविश्वास की जड़ों से बाहर निकलकर यथार्थ को स्वीकार करने से ही ऐसी किसी भी घटना में जान-माल का नुकसान होने से बचा जा सकता है।

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