SECL दीपका प्रबंधन की तानाशाह रवैया, हरदीबाजार के ग्रामीणों को डराने और धमकाने का सरपंच ने लगाया आरोप

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कोरबा (आधार स्तंभ) :  एसईसीएल दीपका क्षेत्र में कार्यरत आउटसोर्सिंग कंपनी कलिंगा के महाप्रबंधक पर गंभीर आरोप लगे हैं। हरदी बाजार के जन प्रतिनिधियों का आरोप है कि 11 सितंबर की रात लगभग 9 बजे कलिंगा के अधिकारी कर्मचारी ने गांव हरदीबाजार में शराब के नशे में धुत्त होकर 30–40 लोगों के साथ पहुंचकर ग्रामीणों के बीच धमकी-चमकी व गुंडागर्दी की। बताया जा रहा है कि उन्होंने गाय के गले में पट्टा बाँधने के बहाने गांव में पहुंचकर ग्रामीणों को डराने-धमकाने की कोशिश की।

गांव के सरपंच व ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि विकास दुबे और उसके बाउंसरों ने 12 सितंबर को तहसील हरदीबाजार में होने वाली भू-विस्थापितों की बैठक को शांत कराने और विरोध को दबाने के लिए आतंक फैलाने की रणनीति बनाई। ग्रामीणों के अनुसार, कंपनी प्रबंधन मकान और संपत्तियों के जबरन सर्वे के लिए दबाव डाल रहा है। और नापी करने की साजिश रच रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि यह सब कुछ SECL दीपका प्रबंधन की स्वीकृति के बिना संभव नहीं है। कंपनी को खदान विस्तार और प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने की इतनी जल्दी है, वे किसी भी स्तर पर उतर आए हैं और तानाशाही रवैया अपना रहे हैं, और इसके लिए ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों को धमकाकर, डराकर और गुंडागर्दी से चुप कराने का प्रयास किया जा रहा है।

स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि

कलिंगा कंपनी के गुंडों और बाउंसरों को गांव में खुली छूट दी गई है। एसईसीएल दीपका प्रबंधन जानबूझकर चुप्पी साधे हुए है। गांव में दहशत का माहौल है और ग्रामीण डर के साए में जी रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन और शासन से मांग की है कि कलिंगा कंपनी की गुंडागर्दी पर तुरंत रोक लगे और SECL दीपका प्रबंधन की भूमिका की उच्चस्तरीय जांच हो।

 

 

गांव के सरपंच व ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि विकास दुबे और उसके बाउंसरों ने 12 सितंबर को तहसील हरदीबाजार में होने वाली भू-विस्थापितों की बैठक को शांत कराने और विरोध को दबाने के लिए आतंक फैलाने की रणनीति बनाई। ग्रामीणों के अनुसार, कंपनी प्रबंधन मकान और संपत्तियों के जबरन सर्वे के लिए दबाव डाल रहा है। और नापी करने की साजिश रच रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि यह सब कुछ SECL दीपका प्रबंधन की स्वीकृति के बिना संभव नहीं है। कंपनी को खदान विस्तार और प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने की इतनी जल्दी है, वे किसी भी स्तर पर उतर आए हैं और तानाशाही रवैया अपना रहे हैं, और इसके लिए ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों को धमकाकर, डराकर और गुंडागर्दी से चुप कराने का प्रयास किया जा रहा है।

स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि

कलिंगा कंपनी के गुंडों और बाउंसरों को गांव में खुली छूट दी गई है। एसईसीएल दीपका प्रबंधन जानबूझकर चुप्पी साधे हुए है। गांव में दहशत का माहौल है और ग्रामीण डर के साए में जी रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन और शासन से मांग की है कि कलिंगा कंपनी की गुंडागर्दी पर तुरंत रोक लगे और SECL दीपका प्रबंधन की भूमिका की उच्चस्तरीय जांच हो।

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