सलिहाभांठा में श्मशान घाट बना गौठान! गायों का डेरा, कचरे का ढेर, पंचायत बेखबर, जनप्रतिनिधि दूसरे ग्राम की सफाई में व्यस्त

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अंतिम संस्कार के लिए ग्रामीण परेशान, श्मशान घाट की बदहाली ने पंचायत की व्यवस्था पर खड़े किए सवाल, स्वच्छता अभियान की अगुवाई करने वाले जनप्रतिनिधि के अपने ही गांव का श्मशान घाट बदहाली का शिकार 

आधार स्तंभ (करतला) : ग्राम पंचायत सलिहाभांठा, विकासखंड करतला में श्मशान घाट की बदहाल स्थिति को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जिस श्मशान घाट में ग्रामीणों को अपने परिजनों का अंतिम संस्कार सम्मानपूर्वक करना चाहिए, वहां अव्यवस्था, गंदगी और कूड़े-कचरे का ढेर परेशानी का कारण बन रहा है। आरोप है कि श्मशान घाट परिसर में गायों को बांधा जा रहा है, जिससे यह स्थान श्मशान घाट के बजाय गौठान जैसा नजर आने लगा है।

श्मशान घाट में गायों का डेरा, सफाई व्यवस्था नदारद

श्मशान घाट जैसे संवेदनशील स्थान पर साफ-सफाई और व्यवस्थित व्यवस्था होना बेहद जरूरी है। लेकिन सलिहाभांठा में सामने आ रही स्थिति इसके उलट दिखाई दे रही है। परिसर में गायों को बांधने और कूड़ा-कचरा जमा होने से ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सवाल यह है कि जब श्मशान घाट की स्थिति इस कदर बिगड़ रही है, तो इसकी देखरेख की जिम्मेदारी निभाने वाले जिम्मेदार आखिर कहां हैं?

पंचायत की जिम्मेदारी पर सवाल, आखिर क्यों नहीं हो रहा सुधार?

ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले सार्वजनिक स्थलों की साफ-सफाई और रखरखाव सुनिश्चित करना स्थानीय व्यवस्था की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। इसके बावजूद श्मशान घाट में गंदगी और अव्यवस्था बनी रहना पंचायत की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। क्या श्मशान घाट की नियमित सफाई नहीं होती? क्या जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को इस समस्या की जानकारी नहीं है? या फिर जानकारी होने के बावजूद अनदेखी की जा रही है?

अंतिम संस्कार में परेशानी, आखिर कब जागेंगे जिम्मेदार?

श्मशान घाट केवल एक सार्वजनिक स्थल नहीं, बल्कि हर परिवार की भावनाओं और अंतिम विदाई से जुड़ा स्थान है। ऐसे में वहां गंदगी का ढेर और मवेशियों को बांधने की स्थिति बेहद चिंताजनक है। अंतिम संस्कार के लिए पहुंचने वाले परिजनों को यदि बुनियादी व्यवस्था के अभाव में परेशानी उठानी पड़े, तो यह स्थानीय प्रशासन के लिए गंभीर चिंता का विषय होना चाहिए।

स्वच्छता अभियान की अगुवाई करने वाले जनप्रतिनिधि के अपने ही गांव का श्मशान घाट बदहाली का शिकार

जनपद पंचायत करतला के उपाध्यक्ष मनोज झा द्वारा बरपाली में स्वच्छता अभियान चलाकर स्वच्छता का संदेश दिया जा रहा है, लेकिन विडंबना यह है कि जिस ग्राम पंचायत सलिहाभांठा में वे स्वयं निवासरत हैं, वहां श्मशान घाट की बदहाली जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रही है। श्मशान घाट में गंदगी का अंबार लगा है, कचरे का ढेर जमा है और मवेशियों को बांधे जाने से अंतिम संस्कार के लिए पहुंचने वाले लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि जब स्वच्छता अभियान की अगुवाई करने वाले जनप्रतिनिधि के अपने ही गांव का श्मशान घाट बदहाली का शिकार है, तो स्वच्छता का संदेश आखिर कितना प्रभावी है? क्या स्वच्छता अभियान केवल दूसरे गांवों तक सीमित रहेगा या अपने गांव के श्मशान घाट की सुध भी ली जाएगी?

ग्रामीणों को कार्रवाई का इंतजार

अब जरूरत है कि ग्राम पंचायत सलिहाभांठा और संबंधित अधिकारी मामले को गंभीरता से लेते हुए श्मशान घाट की तत्काल सफाई कराएं, कूड़े-कचरे का निपटारा करें और परिसर में मवेशियों को बांधने पर रोक लगाने के लिए उचित व्यवस्था बनाएं।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब गांव के श्मशान घाट की दुर्दशा दूर करने की जिम्मेदारी पंचायत की है, तो फिर इस बदहाली का खामियाजा ग्रामीण क्यों भुगतें?

अब देखना होगा कि ग्राम पंचायत सलिहाभांठा के जिम्मेदार इस समस्या पर कब संज्ञान लेते हैं और ग्रामीणों को कब तक व्यवस्थित श्मशान घाट की सुविधा मिल पाती है।

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