कोरबा(आधार स्तम्भ) : कोरबा जिले में हाल-फिलहाल हुई दो मौतों को लेकर बड़ा ही सस्पेंस रहा। पिछले 10 दिनों से चले आ रहे सस्पेंस की एक गुत्थी सुलझ गई जिसमें युवक की रक्तरंजित मिली लाश का मामला नृशंस हत्या नहीं बल्कि आत्महत्या का निकला तो दूसरी तरफ एक महिला की संदिग्ध मौत की पड़ताल करने के लिए उसकी कब्र खोदकर लाश निकाली गई।
पहली घटना 10 मई की थी जिसमें सीएसईबी चौकी क्षेत्र अंतर्गत कोहड़िया नाला के पास खून से लथपथ लाश मिली। धारदार हथियार से हत्या कर शव फेंके जाने का यह मामला लग रहा था। मृतक बसंत पटेल 37 वर्ष मूल रूप से जांजगीर-चांपा जिले के पामगढ़ ब्लॉक के सोनसरी गांव का निवासी था और पिछले करीब तीन साल से वह कोरबा के दुरपा सर्वमंगला बरमपुर में किराए के मकान में रहकर इंडस्ट्रियल एरिया स्थित संजय फैक्ट्री में काम करता था। 9 मई शुक्रवार सुबह 8 बजे फैक्ट्री जाने के लिए घर से निकला था, लेकिन रात तक वापस नहीं लौटा। शनिवार सुबह लाश मिली जिसे नृशंस हत्या माना जा रहा था। फोरेंसिक टीम, डॉग स्क्वायड और पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की

घटना दिनांक को ही डॉग बाघा घटना स्थल से दौड़ते हुए एक मकान के पास जाकर रुका जहां मृतक के जूते मिले। इस घर से एक सदस्य गायब था जिस पर शुरुआती संदेह गहराया। बाद में ज्ञात हुआ कि उक्त मकान में रहने वाला परिवार मृतक के ननिहाल गांव का निवासी है और मृतक का यहां आना-जाना पहले से होता था। घर से गायब मिले व्यक्ति से भी पूछताछ की गई पुलिस ने साइबर टीम के साथ मिलकर घटना स्थल से लेकर इस मकान तक पूरे रास्ते को बारीकी से खंगाला, सीसीटीवी फुटेज भी चेक किया।कोई ऐसा सुराग नहीं मिला जिसमें यह पता चला हो कि मृतक जब इस घर से निकला तो उसके पीछे-पीछे कोई था जिसने रास्ते में उसे मार कर फेंक दिया हो। यानी मृतक घर से खाली पैर अकेले ही निकला था और घटनास्थल तक पहुंचा। मौके से एक टूटी हुई कांच की बोतल बरामद की गई थी। अंततः निष्कर्ष निकला कि बसंत ने उक्त कांच के टूटे बोतल से ही अपना गला काफी गहरे तक रेता और मौके पर ही लहूलुहान होकर गिर पड़ा, उसे किसी ने मारा नहीं था।

अब बात आई कि उसने ऐसा क्यों किया तो उसके सहकर्मी मित्रों से पता चला कि वह काफी समय से अजीबोगरीब हरकतें कर रहा था। जैसे कि उसके मन में अपनी जान को लेकर भय बना रहता था कि उसे कोई मारने आ रहा है, उसे मारने के लिए दौड़ा रहा है। इस तरह किसी मानसिक तनाव और डर के दौर से वह गुजर रहा था। पुलिस द्वारा माना जा रहा है कि इस वजह से उसने खुद को मौत से घाट उतार लिया। बहरहाल अब यह मामला खुदकुशी का होने के साथ ही मर्ग जांच पर विराम लग गया है।
विनीता की मौत कैसे हुई,पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार
दूसरा मामला जिले के उरगा थाना क्षेत्र का है। ग्राम भलपहरी की निवासी विनीता की मौत पर उसके परिजन ने कफन-दफन कर अंतिम संस्कार कर दिया लेकिन इस तरह से किए गए अंतिम संस्कार को लेकर मायके पक्ष ने कई सवाल खड़े कर दिए। तब अंतिम संस्कार के चार दिन बाद कब्र खोदकर उसकी लाश निकाली गई और पोस्टमार्टम कराया गया है।
परिवार का दावा है कि विनीता को दहेज के लिए प्रताड़ित किया जाता था,आए दिन मारपीट होती थी, यहां तक कि पहले फांसी लगाकर मारने की कोशिश भी की गई थी। इसके बाद शुक्रवार को पुलिस बल, तहसीलदार, स्वास्थ्य विभाग और फॉरेंसिक टीम की मौजूदगी में विनीता का शव कब्र से निकाला गया। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जुटे रहे।
बताया जा रहा है कि शुरू में मृतिका के ससुर ने शव निकालने का विरोध भी किया लेकिन पुलिस की समझाइश के बाद कार्रवाई आगे बढ़ी।
मायके पक्ष का आरोप है कि पति मुकेश पाटले और उसके माता-पिता विनीता को लंबे समय से दहेज और घरेलू हिंसा का शिकार बना रहे थे।
आरोप है कि मुकेश आए दिन मारपीट करता था, गाली-गलौज करता था और कई बार घर से निकाल देता था।
रोते-बिलखते विनीता मायके पहुंचती थी… लेकिन बच्चों के भविष्य की खातिर परिवार हर बार समझौता कर उसे वापस ससुराल भेज देता था।
मृतका की मां ने बड़ा खुलासा करते हुए आरोप लगाया कि कुछ समय पहले मुकेश ने विनीता को फांसी लगाकर मारने की कोशिश भी की थी।
वहीं हाल ही में मुकेश कुछ रिश्तेदारों को “गांव के पंच-सरपंच” बताकर गिधौरी पहुंचा और समझाइश के नाम पर विनीता को वापस ले गया।
अब परिवार सवाल उठा रहा है कि आखिर जिन लोगों को पंच-सरपंच बताया गया… वे असल में रिश्तेदार क्यों निकले?
परिजनों का दावा है कि मौत के बाद जब विनीता के शव को नहलाया गया तो शरीर पर कई चोट के निशान दिखाई दिए। नाक और मुंह से खून निकलने की बात भी सामने आई है। इसके बावजूद बिना पोस्टमार्टम आनन-फानन में शव दफन कर दिया गया। यही वजह है कि अब शक और गहरा गया है।
विनीता की बहन ने बताया कि कुछ दिन पहले तक विनीता पूरी तरह स्वस्थ थी… शादी कार्यक्रम में डांस भी कर रही थी।
फिर आखिर एक-दो दिन में ऐसा क्या हुआ कि उसकी मौत हो गई?
अगर मौत बीमारी से हुई थी… तो पोस्टमार्टम से बचने की कोशिश क्यों की गई? और ससुराल पक्ष सही जानकारी देने से क्यों बचता रहा?
जब मुकेश पाटले से सवाल किया गया तो वह कैमरे के सामने गोलमोल जवाब देता नजर आया।
उसने सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया… लेकिन यह नहीं बता पाया कि अगर सब सामान्य था तो विनीता बार-बार मायके क्यों जाती थी?
फिलहाल पुलिस ने शव उत्खनन कर पोस्टमार्टम कराया है और फॉरेंसिक जांच भी की गई है।
उरगा थाना प्रभारी का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई होगी।
अब पूरा मामला पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक रिपोर्ट पर टिका है…
जो तय करेगी कि विनीता की मौत बीमारी से हुई… या फिर दहेज और मारपीट की प्रताड़ना ने उसकी जान ले ली।



