चक्रवात ‘अनर्ब’ के अलर्ट पर जिलों में अलग-अलग फैसले: कहीं एक दिन – कहीं दो दिन स्कूल बंद, तो कोरबा और रायपुर में शिक्षकों को बुलाया गया विद्यालय!

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एक ही मौसम चेतावनी पर प्रशासनिक निर्णयों में दिखा अंतर, विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए छुट्टी घोषित लेकिन शिक्षकों की छुट्टी पर स्पष्टता नहीं होने से उठे सवाल

छत्तीसगढ़ (आधार स्तंभ) : बंगाल की खाड़ी में उठे चक्रवाती तूफान ‘अनर्ब’ और संभावित भारी बारिश के अलर्ट के बीच छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में जिला प्रशासन ने विद्यार्थियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्कूलों में अवकाश घोषित किया। लेकिन इन आदेशों में जिलावार काफी अंतर देखने को मिला। कहीं एक दिन तो कहीं दो दिन का अवकाश घोषित किया गया। वहीं कोरबा और रायपुर जिले में जारी आदेशों को लेकर एक अलग ही स्थिति सामने आई, जहां विद्यार्थियों के लिए तो एहतियातन छुट्टी घोषित की गई, लेकिन शिक्षकों के लिए अवकाश को लेकर स्पष्ट निर्देश नहीं होने के कारण उन्हें 29 अक्टूबर को विद्यालय पहुंचना पड़ा।

कहीं एक दिन तो कहीं दो दिन की छुट्टी

प्राप्त आदेशों के अनुसार मुंगेली, बिलासपुर, बालोद, बलौदाबाजार-भाटापारा आदि जिले में 29 अक्टूबर को एक दिवसीय अवकाश घोषित किया गया। वहीं दुर्ग जिले में 29 एवं 30 अक्टूबर को दो दिनों का अवकाश घोषित किया गया।

इसके अलावा जांजगीर-चांपा, रायगढ़, सारंगढ़-बिलाईगढ़, सक्ती आदि जिले में अलग-अलग आदेश जारी कर 29 एवं 30 अक्टूबर को अवकाश घोषित किया गया। इन जिलों में विद्यार्थियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए दो दिनों तक शैक्षणिक गतिविधियां स्थगित रखने का निर्णय लिया गया।

कोरबा और रायपुर के आदेश में अलग व्यवस्था, शिक्षकों को बुलाया गया स्कूल

इन सभी जिलों के आदेशों से अलग कोरबा और रायपुर जिले में जारी आदेश चर्चा का विषय बन गए हैं। दोनों जिलों में 29 अक्टूबर को विद्यार्थियों के लिए एहतियातन अवकाश घोषित किया गया, लेकिन आदेश में शिक्षकों के लिए स्पष्ट रूप से छुट्टी का उल्लेख नहीं किया गया।

इसका परिणाम यह हुआ कि विद्यार्थियों के लिए स्कूल बंद रहने के बावजूद शिक्षकों को 29 अक्टूबर को विद्यालय पहुंचना पड़ा। ऐसे में सवाल उठता है कि जब खराब मौसम और चक्रवाती तूफान की आशंका के चलते बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए छुट्टी घोषित की गई थी, तो क्या विद्यालय पहुंचने वाले शिक्षकों की सुरक्षा उतनी ही महत्वपूर्ण नहीं थी?

एक ही चेतावनी, लेकिन प्रशासनिक निर्णय अलग-अलग क्यों?

प्रदेश के अलग-अलग जिलों में जारी आदेशों की तुलना करने पर प्रशासनिक निर्णयों में स्पष्ट अंतर दिखाई देता है। कुछ जिलों में विद्यार्थियों के साथ विद्यालयों की शैक्षणिक गतिविधियां दो दिनों तक स्थगित रखने का निर्णय लिया गया, जबकि कोरबा और रायपुर में केवल विद्यार्थियों की छुट्टी का आदेश जारी हुआ और शिक्षकों की उपस्थिति को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं रही।

बहरहाल, खराब मौसम की आशंका के बीच विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन का सतर्क रहना आवश्यक है, लेकिन ऐसे आदेश जारी करते समय शिक्षकों एवं अन्य विद्यालयीन कर्मचारियों की सुरक्षा और उपस्थिति को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाने चाहिए थे।

अब सवाल यह है कि कोरबा और रायपुर जिले में विद्यार्थियों के लिए छुट्टी घोषित करने के बावजूद शिक्षकों को विद्यालय बुलाने की व्यवस्था क्यों बनी रही? क्या आदेश जारी करते समय शिक्षकों की सुरक्षा और उनकी उपस्थिति को लेकर विचार नहीं किया गया? इन सवालों पर शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन की स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है।

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