कोरबा(आधार स्तंभ) : कोरबा शहर में सिटी कोतवाली से महज 200 मीटर दूर पुराना बस स्टैंड परिसर देर रात तक गुलजार होने के साथ-साथ शराबियों व अन्य तरह के नशेड़ियों का अड्डा बना रहता है। रात 8 बजे के बाद से यहां देर रात तक असामाजिक तत्वों का डेरा लगता है और आसपास के दुकान,ठेले खोमचे भी 10:30 बजे के बाद तक खुले रहते हैं। इनमें असामाजिक तत्वों की आवाजाही बने रहने के कारण अक्सर घटनाओं की आशंका भी बनी रहती है। इस तरफ कई बार ध्यानाकर्षण कराने के बाद भी सख्ती नहीं बरती गई है। इन्हीं आशंकाओं और ढिलाई के मध्य पिछली रात एक संभ्रांत परिवार का व्यक्ति शराबियों का शिकार हो गया।
पीड़ित आनंद रैकवार पिता स्व. अनिल सिंह रैकवार उम्र 50 वर्ष, मिशन रोड वार्ड नंबर 1 कोरबा का निवासी है। उसका मिशन रोड में श्री फैंसी ड्रेस नामक दुकान है। उसे रायगढ में फैंसी ड्रेस संबंधी सामान भेजना था जिसके लिये बस पता करने के लिये पुराना बस स्टैण्ड कोरबा करीब रात्रि 9.50 बजे गया था और राजा गुप्ता के होटल के पास स्थित पान ठेला वाले मोनू सिंधी से बस के बारे में पूछताछ कर रहा था। वहीं किनारे में चार व्यक्ति बैठकर शराब का सेवन कर रहे थे, इतने में सुभाष विश्वकर्मा उसके पास आया और बोलने लगा कि तुम मुझे क्यों घूर रहे हो इतने में उनके तीन और साथी आये और चारों मिलकर अश्लील गाली-गलौच करते हुए जान से मारने की धमकी देते हुए मारपीट किये। सुभाष विश्वकर्मा हाथ-मुक्के से एवं उसके तीन अन्य साथी बेल्ट, डण्डा एवं राड से मारपीट किये, उसके बाद वह चारों होटल के भट्ठी तरफ खींचते ले जा रहे थे, तभी होटल वाला देखा और बीच बचाव कर मना किया। घटना के बाद अपने पुत्र अंश रैकवार व परिचितों को फोन कर घटना के बारे में बताया। मारपीट के दौरान गले में पहना सोने का चैन कहीं गिर गया। पुलिस ने आनंद रैकवार की रिपोर्ट पर सुभाष विश्वकर्मा व उसके तीन अन्य साथी के विरुद्ध धारा 294, 323, 34, 506 के तहत जुर्म दर्ज किया है। सार्वजनिक जगह में शराब पीने पर मामला नहीं बना है।
रात में गश्त चौकस करने की जरूरत : अभी त्योहारों का सीजन शुरू हो गया है और ऐसे में देर रात तक सड़कों पर चहल-पहल बनी रहेगी। आम जनता का अपने परिजनों के साथ घूमने-फिरने के लिए निकलना होगा तो वहीं असामाजिक तत्व भी अपनी गतिविधियों में संलिप्त रहेंगे। ऐसे में जरूरी है कि खासकर शहर के भीतर और आसपास के क्षेत्र में पुलिस की गश्त रात 9 बजे के बाद बढ़ाई जानी चाहिए। आम सड़क के अलावा सार्वजनिक स्थल और सूने क्षेत्र में खास सावधानी बरतने की जरूरत है जो कि असामाजिक तत्वों का सुरक्षित ठिकाना होते हैं। असामाजिक तत्वों में कानून का डर अपेक्षाकृत कम देखने को मिल रहा है और यही वजह है कि कई बार दिन के उजाले में भी शराबखोरी सार्वजनिक जगह पर होती दिखती है। पुराना बस स्टैंड के अलावा सामने गौरी शंकर मंदिर के पीछे बनी रसोई के चबूतरे पर भी बैठकर शराब सेवन करते देखा जा सकता है। मना करने पर अभद्रता करते हैं इसलिए कोई इनके मुंह लगा नहीं चाहता लेकिन गश्त बढ़ाई जाए तो निःसंदेह इस तरह के मामलों में कमी आएगी। स्टेशन मार्ग, मोतीसागर पारा, पुरानी बस्ती, इंदिरा नगर फोकट पारा, नया बस स्टैंड, स्टेडियम मार्ग, राताखार, मुड़ापार, बुधवारी में काम्प्लेक्स के पीछे आदि क्षेत्र भी शराबियों का ठिकाना बनते हैं। युवा वर्ग बड़ी तेजी से नशा की ओर अग्रसर है, शाम के बाद कुछ दोस्त, डिस्पोजल, चखना और शराब/बीयर और सूना इलाका इनकी रोजमर्रा की जिंदगी हो चली है। इसी तरह रात 9 बजे के बाद सड़कों पर तेज रफ्तार 3 सवारी बाईक में युवक शोर मचाते गुजरते हैं। सीतामणी से लेकर, पावर हाउस रोड, टीपी नगर, सीएसईबी चौक, बुधवारी, घण्टाघर मार्ग व निहारिका क्षेत्र में तो यह नजारा सहज ही देखा जा सकता है। इन्हें मालूम है कि रात में चेकिंग होती नहीं तो पकड़ेगा कौन? पुलिस कप्तान के सख्त निर्देश के बाद भी थाना-चौकी स्तर पर लापरवाही बरती जा रही है। बीट प्रभारी भी अपने में मस्त रहते हैं तो अधीनस्थ कुछ पुराने/नए कर्मठ कर्मियों को छोड़कर बाकी के लिए रामराज्य है।



