खुद के कार्यालय की सफाई नहीं, गांवों में स्वच्छता का संदेश देने निकले जनप्रतिनिधि! उपाध्यक्ष मनोज झा के अभियान की सार्थकता पर उठे सवाल
बरपाली/करतला (आधार स्तंभ) : स्वच्छता का संदेश देने और गांवों को साफ-सुथरा बनाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे सेवा संकल्प अभियान की हकीकत पर अब सवाल उठने लगे हैं। जनपद पंचायत करतला के उपाध्यक्ष मनोज झा के नेतृत्व में ग्राम पंचायत बरपाली में स्वच्छता अभियान चलाने की पहल की गई है, लेकिन दूसरी ओर जनपद पंचायत कार्यालय परिसर की बदहाल तस्वीरें अभियान की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर रही हैं। कार्यालय परिसर में जगह-जगह कचरे का ढेर, बिखरा हुआ अनुपयोगी मलबा और गंदगी से भरे शौचालय स्वच्छता के दावों को आईना दिखा रहे हैं।
जिस कार्यालय से जारी हुआ स्वच्छता का फरमान, वहीं गंदगी का साम्राज्य!
जनपद पंचायत करतला कार्यालय से 7 अक्टूबर 2026 पत्र जारी कर सेवा पखवाड़ा ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत 9 अक्टूबर 2026 को ग्राम पंचायत बरपाली में स्वच्छता अभियान आयोजित किया गया। पत्र में अधिकारियों एवं कर्मचारियों को अनिवार्य रूप से उपस्थित होकर कार्यक्रम में सहभागिता देने के निर्देश भी दिए गए हैं। अभियान का उद्देश्य स्वच्छता के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना, स्वच्छता दीदियों का सम्मान करना और जनभागीदारी से स्वच्छ एवं सुंदर गांव बनाना बताया गया है।
लेकिन सवाल यह है कि जब स्वच्छता का संदेश देने वाला जनपद पंचायत कार्यालय परिसर ही गंदगी से घिरा दिखाई दे रहा है, तो इस अभियान के दावों को किस आधार पर परखा जाए? परिसर में कचरा और पुराने निर्माण सामग्री जैसी वस्तुएं बिखरी नजर आ रही हैं। वहीं शौचालयों की तस्वीरों में गंदे फर्श, दागदार दीवारें और साफ-सफाई की कमी दिखाई देती है। ऐसी स्थिति में कार्यालय आने वाले नागरिकों और वहां कार्यरत कर्मचारियों को किस तरह की स्वच्छता व्यवस्था मिल रही है, यह जांच का विषय है।
सामान्य सभा की बैठक के बीच कार्यालय की बदहाली पर सवाल
जनपद पंचायत करतला में शुक्रवार, 23 अक्टूबर को सामान्य सभा की बैठक आयोजित हुई, जिसमें जनप्रतिनिधियों के साथ विभिन्न विभागों के अधिकारी भी मौजूद रहे। एक ओर बैठक में क्षेत्र के विकास और जनसमस्याओं से जुड़े विषयों पर चर्चा की जा रही थी, वहीं दूसरी ओर जनपद पंचायत कार्यालय परिसर में फैली गंदगी और बदहाल शौचालय व्यवस्था स्वच्छता के दावों पर सवाल खड़े कर रही है। गौरतलब है कि जनपद पंचायत कार्यालय द्वारा सेवा पखवाड़ा ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत स्वच्छता अभियान आयोजित करने के लिए पत्र जारी किया गया था। ऐसे में सवाल उठता है कि जब कार्यालय परिसर में ही साफ-सफाई की स्थिति संतोषजनक नहीं दिख रही है, तो गांवों में स्वच्छता का संदेश कितना प्रभावी होगा?
शौचालय की हालत बदतर, जिम्मेदारों की नजर आखिर क्यों नहीं?
सरकारी कार्यालयों में साफ-सफाई और स्वच्छ शौचालय बुनियादी सुविधाओं में शामिल हैं। इसके बावजूद तस्वीरों में दिखाई दे रही स्थिति नियमित सफाई व्यवस्था पर सवाल उठाती है। यदि कार्यालय परिसर में ही कचरे का उचित निपटान और शौचालयों की नियमित सफाई सुनिश्चित नहीं हो पा रही है, तो गांवों में स्वच्छता का संदेश देने वाले अभियान की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
उपाध्यक्ष मनोज झा के अभियान की सार्थकता पर सवाल
जनपद पंचायत उपाध्यक्ष मनोज कुमार झा के नेतृत्व में बरपाली में चलाए जा रहे स्वच्छता अभियान का उद्देश्य निश्चित रूप से सराहनीय हो सकता है, लेकिन स्वच्छता की शुरुआत अपने आसपास से होना जरूरी है। ऐसे में जनपद पंचायत कार्यालय की सफाई व्यवस्था को दुरुस्त कराना भी जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की प्राथमिकता होनी चाहिए। जनपद कार्यालय करतला से जारी पत्र में सेवा संकल्प अभियान के तहत 17 सितम्बर से 17 अक्टूबर तक सेवा पखवाड़ा आयोजित किये जाने का जिक्र है। अगर प्रत्येक दिन एक ग्राम में भी स्वच्छता अभियान चलाया जाता तो आसपास के 15 से 20 ग्रामों में स्वच्छता का संदेश दिया जा सकता था किंतु सिर्फ बरपाली में ही स्वच्छता संदेश देने के पीछे की राजनीति समझ से परे है। जबकि उपाध्यक्ष मनोज झा के निवास ग्राम सलिहाभांठा में भी गंदगी का अंबार है तो सिर्फ ग्राम बरपाली में ही स्वच्छता अभियान क्यों?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सेवा संकल्प अभियान केवल फोटो खिंचवाने और औपचारिक कार्यक्रमों तक सीमित रहेगा, या जनपद पंचायत कार्यालय की बदहाली दूर करने के लिए भी ठोस कदम उठाए जाएंगे?
अब देखना होगा कि जनपद पंचायत के जिम्मेदार अधिकारी कार्यालय परिसर में नियमित सफाई, कचरे के उचित निपटान और शौचालयों की स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए क्या कार्रवाई करते हैं। क्योंकि स्वच्छता का संदेश तभी प्रभावी होगा, जब उसकी शुरुआत अपने कार्यालय, अपने गांव और अपने घर से होगी।




