नई दिल्ली,(आधार स्तंभ) : मशहूर फॉर्च्यून (Fortune) ब्रांड नाम से खाने का तेल बनाने वाली कंपनी AWL एग्री बिजनेस लिमिटेड पर खाद्य सुरक्षा नियामक FSSAI ने जुर्माना लगाया है। कंपनी के फॉर्च्यून फ्रायोला (Fryola) रिफाइंड सनफ्लावर ऑयल यानी सूरजमुखी तेल का सैंपल लैब टेस्ट में फेल हो गया। टेस्ट में पाया गया कि तेल में विटामिन D की मात्रा तय मानकों से काफी कम थी। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने गोवा स्थित ताज फोर्ट अगुआड़ा रिसॉर्ट एंड स्पा से 1 लीटर फॉर्च्यून फ्रायोला सनफ्लावर ऑयल का सैंपल जांच के लिए लिया था। यह सैंपल AWL एग्री बिजनेस की मंगलोर यूनिट में तैयार किया गया था। रिपोर्ट पक्की होने के बाद गोवा के एडजुडिकेटिंग अधिकारी ने कंपनी पर जुर्माना लगाने का आदेश जारी किया।पहली लैब रिपोर्ट में पाया गया कि तेल में विटामिन A और विटामिन D दोनों का स्तर FSSAI के नियमों (2018) से कम था। इसे खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के तहत सबस्टैंडर्ड यानी निम्न गुणवत्ता वाला माना गया।
एडब्ल्यूएल एग्री बिजनेस ने पहली रिपोर्ट को चुनौती दी और दोबारा जांच की मांग की। लेकिन दूसरी लैब ने भी पुष्टि की कि तेल में विटामिन D की मात्रा तय सीमा से काफी कम थी। FSSAI इन दिनों खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, विज्ञापनों और दावों को लेकर काफी सख्ती बरत रहा है। इसी कड़ी में FSSAI ने पाई फूड्स (PIE Foods) के मोन्क फ्रूट स्वीटनर प्रोडक्ट्स की बिक्री पर भी रोक लगा दी है। हाल में डाबर के कई प्रोडक्ट्स पर भी ‘100% शुद्धता’ के दावों को लेकर कार्रवाई की थी। हालांकि आज यानी शुक्रवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने FSSAI का आदेश पलटते हुए डाबर के हक में फैसला सुनाया। के नियमों के मुताबिक, लोगों में पोषण की कमी दूर करने के लिए कुकिंग ऑयल में विटामिन A और D मिलाना अनिवार्य मानकों के तहत आता है। जब किसी फोर्टिफाइड तेल में इन विटामिनों की मात्रा तय मानक से कम होती है, तो उपभोक्ताओं को वह पोषण नहीं मिल पाता जिसका दावा पैकेट पर किया जाता है।




