कोरबा(आधार स्तंभ) : प्राय: कई थानों में थानेदार की नाक के नीचे उनके सीधेपन और भरोसे का फायदा उठाकर, तो कुछ की जानकारी में कुछ आरक्षक,प्रधान आरक्षक और कुछ मैदानी अमला अपनी मनमानी कर रहे हैं। ऐसे कई मामले प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से सामने आ चुके हैं जिनमें से कुछ में कार्रवाई हुई तो कुछ को बख्श दिया गया। जिन्हें बख्श दिया गया, वे और भी जोर-जोर से अपनी मनमानी कर रहे हैं कि हमारा कौन क्या बिगाड़ लेगा..? कुछ ऐसी ही मानसिकता से ग्रसित चंद स्टाफ से क्षेत्र की जनता भी परेशान है। चूंकि, उन्हें वहां रहना है, काम करना है इसलिए कोई पंगा लेना नहीं चाहता। इस मामले में हिम्मत दिखाई गई।
ऐसी मनमानी के बीच पाली थाना क्षेत्र से एक मामला उजागर हुआ है जिसमें थाना में झूठी एफआईआर दर्ज कर दी गई। घटना 7 जुलाई की है जिसमें 8 जुलाई को आबकारी अधिनियम की धारा 36(च) में अपराध दर्ज किया गया है। इस माह 1 से लेकर 9 जुलाई के बीच सार्वजनिक स्थल पर शराब पीने का यही एकमात्र प्रकरण दर्ज हुआ है लेकिन वह भी झूठा बताया जा रहा है।
जिस रामेश्वर प्रसाद मरार (पटेल) को आरोपी बनाया गया है उसका दवा है कि उसने शराब सेवन किया ही नहीं/वह शराब नहीं पीता, फिर भी आरोपी बना दिया गया!
👉🏻 यह हुआ घटनाक्रम
पीड़ित रामेश्वर के मुताबिक उसके चचेरे भाई अनिल पटेल की दुकान पाली नेशनल हाइवे मार्ग में स्थित है जहां वह भाई को खाना खाने के लिए छुट्टी देने गया था। अनिल पटेल घर गया था तब वह दुकान में बैठा था। चाय, कोल्ड ड्रिंक की दुकान में दोपहर करीब 3 बजे पाली थाना के प्रधान आरक्षक सहित चार पुलिसकर्मी पहुंचे और दारू पिलाते हो कह कर जबरदस्ती थाना ले गए। यहां उससे 35 हजार रुपये की डिमांड की गई जो बात तय होते-होते 5000 तक पहुंची। रुपए नहीं देने पर जेल भेजने की धमकी दी जाती रही। रामेश्वर के भाई अनिल पटेल को भी थाना लाया गया। बात 5000 रुपए पर अटकी तो 3000 आज और 2 हजारे दूसरे दिन ले लेने की मोहलत मांगी गई, लेकिन इस पर पुलिसकर्मी नहीं माने और जेल भेजने की धमकी देते हुए रात 11 बजे तक थाना में बिठाकर रखा गया। इस बीच सारे घटनाक्रम की जानकारी नगर पंचायत पाली क्षेत्र के पार्षद अनीस पटेल को हुई जो कि अनिल पटेल का भाई है, उनके द्वारा पुलिस अधीक्षक को रात में ही घटनाक्रम के बारे में बताया गया। एसपी के निर्देश पर पाली थाना प्रभारी थाना पहुंचे और उन्हें भी इस पूरे मामले की जानकारी संभवत: नहीं थी।आखिरकार रात 11:30 बजे सबको थाना से जाने दिया गया।
👉🏻 जो पी रहे थे, उनको थाना लाने के बाद छोड़ दिया
रामेश्वर ने बताया कि उसकी दुकान से थोड़ा आगे खाली जगह पर दो लोग कहीं से लाई हुई शराब पी रहे थे। उन्हें पकड़कर थाना लाया गया था जिन्हें किसी विधायक के किसी आदमी का फोन आने के बाद छोड़ दिया गया, लेकिन रामेश्वर को जेल भेजने का भय दिखाकर वसूली का दबाव बनाया जाता रहा। देर रात टीआई द्वारा छोड़ दिए जाने तक किसी भी तरह का अपराध पंजीबद्ध नहीं किया गया था लेकिन दूसरे दिन 8 जुलाई को धारा 36(च) के तहत उक्त प्रधान आरक्षक की तहरीर पर एफआईआर दर्ज की गई। रामेश्वर पटेल ने इस पूरे मामले से आहत होकर और चूंकि वह शराब का सेवन नहीं करता, उसके बावजूद शराब पीने के मामले में आरोपी बनाए जाने से व्यथित होकर पुलिस अधीक्षक से पूरे मामले व प्रधान आरक्षक नरेन्द्र कुमार लहरे, आरक्षक रामकुमार चंद्रा, नरेश बंजारे, टिपेन्द्र सिंह तंवर की शिकायत की है। रामेश्वर ने यह भी बताया कि उक्त पुलिसकर्मियों के द्वारा उसे बार-बार चेतावनी दी जा रही है कि कोर्ट में उपस्थित होना तो वहां बताना कि वह शराब पी रहा था। पीड़ित के बताए अनुसार उसके भाई की दुकान में यह पुलिसकर्मी अक्सर आते हैं, मुफ्त में तरह-तरह के सामान लेकर जाते हैं और पैसा नहीं देते। इनकी धमकियों से वह काफी भयभीत है। 7 जुलाई के घटनाक्रम के बाद से क्षेत्र की इस एकमात्र दुकान पर इन पुलिस कर्मियों की नजर है और यह बात भी कहते फिरते हैं कि इसे टारगेट में लिया गया है। जैसे ही मौका मिलेगा पकड़कर जेल भेज देंगे।
👉🏻 पहले भी आ चुका है मामला,लेकिन डर ऐसा की अधिकारी के सामने भी मुंह नहीं खोले
बताते चलें कि पिछले महीने पाली थाना के ही दो पुलिसकर्मियों पर एक किसान से उसके खेत में समतलीकरण कार्य के दौरान पहुंचकर चमकाते हुए 30000 रुपए वसूल कर लेने का मामला सामने आया था। इसका प्रमाण देने के बावजूद संबंधित लोगों पर किसी तरह की कार्रवाई नहीं हुई। हालांकि एसपी के निर्देश पर कटघोरा SDOP के द्वारा पीड़ित पक्ष को बुलाकर सारी जानकारी हासिल की गई लेकिन उक्त पुलिसकर्मियों का भय इतना है कि भयादोहन का शिकार होने के बाद भी पिता-पुत्र ने एसडीओपी के सामने मुंह खोलने की हिम्मत नहीं दिखाई। पहले 12 हजार फिर 30 हजार लुटा बैठे पिता-पुत्र को इस बात का भय रहा कि उन्हें क्षेत्र में रहना है, गाड़ी का काम करना है। आज अगर शिकायत कर दिए तो कल की क्या गारंटी की किसी मामले में फंसा कर झूठा अपराध दर्ज न कर दिया जाए। इन्हीं लोगों से जुड़ा यह दूसरा मामला भी घटित हो गया है। अब देखना है कि इस तरह की प्रवृत्ति पर अंकुश लगेगा, कोई कार्रवाई होगी या फिर ढर्रे पर चलता रहेगा..?
नरेन्द्र कुमार लहरे जो कि थाना पाली में प्रधान आरक्षक गस्ती के पद पर पदस्थ है ने रिपोर्ट लिखाया है कि 07/07/2026 को टाऊन पेट्रोलिंग के दौरान हमराह स्टाफ आरक्षक 517, 166 के साथ टाऊन पाली रवाना हुआ था कि जरिये मुखबिर सूचना मिला कि रंगोले चौक के पास मेन रोड किनारे एक व्यक्ति बैठ कर शराब पी रहा है। सूचना पर हमराह स्टाफ एवं गवाह के साथ मौके पर जाकर घेराबंदी कर दबिश दिया और एक व्यक्ति को पकड़े जिससे पूछताछ करने पर अपना नाम रामेश्वर प्रसाद मरार पिता नारायण प्रसाद मरार उम्र 33 वर्ष साकिन नेवसा हरदीबाजार थाना हरदीबाजार हाल-मुकाम पटेल कोलड्रिंक दुकान रंगोले चौक पाली थाना पाली जिला का बताया तथा आम जगह पर बैठ कर शराब पीना स्वीकार किया । उसके कब्जे से पेश करने पर दो नग देशी प्लेन मदिरा का खुला हुआ शीशी जिसमें से एक शीशी भरा हुआ एवं एक शीशी अधभरा शराबगंधयुक्त को पेश करने पर दो गवाह लके समक्ष जप्ती पत्रक के जप्त किया गया। आरोपी का उक्त कृत्य आबकारी एक्ट का घटित करना पाये जाने से आरोपी के विरूध्द विधिवत जप्ती गिरफ्तारी कार्यवाही किया गया मामला जमानतीय होने से तथा आरोपी द्वारा मौके पर सक्षम जमानतदार पेश करने पर जमानत मुचलका पर रिहा किया। अपराध पंजीबध्द कर विवेचना में लिया गया।




