बस्तर में भर्ती में गड़बड़ी का आरोप, रसोइया के अनुभव पर “हाउस फादर” की नियुक्ति, शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं

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जगदलपुर (आधार स्तम्भ) : बस्तर जिले में महिला एवं बाल विकास विभाग के तहत मिशन वात्सल्य योजना में की गई भर्ती प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि भर्ती नियमों के विपरीत अनुभव प्रमाण पत्र के आधार पर अयोग्य अभ्यर्थी को हाउस फादर जैसे महत्वपूर्ण पद पर नियुक्ति दे दी गई। मामले में दस्तावेजी शिकायत के बावजूद कलेक्टर कार्यालय द्वारा अब तक कोई कार्रवाई नहीं किए जाने से प्रशासन की कार्यशैली और नीयत पर सवाल उठ रहे हैं। मामला अब मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंच गया है, जहां से कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है।

जानकारी के अनुसार, कार्यालय जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग जगदलपुर द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य बाल संरक्षण समिति, नया रायपुर के निर्देशानुसार मिशन वात्सल्य योजना के तहत शासकीय बाल देखरेख संस्थाओं एवं किशोर न्याय बोर्ड तथा बाल कल्याण समिति के विभिन्न संविदा पदों पर भर्ती के लिए 27 दिसंबर 2024 तक आवेदन आमंत्रित किए गए थे। इन पदों में परामर्शदाता, स्टोर कीपर सह लेखापाल, हाउस फादर, पैरामेडिकल स्टाफ, पीटी इंस्ट्रक्टर सह योग प्रशिक्षक, एजुकेटर कला एवं क्राफ्ट सह संगीत शिक्षक, रसोइया तथा सहायक सह रात्रि चौकीदार सहित कुल विभिन्न पद शामिल थे।

भर्ती प्रक्रिया में अनियमितता की आशंका को लेकर सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के तहत जनसूचना अधिकारी से चयनित अभ्यर्थियों के अनुभव प्रमाण पत्रों की जानकारी मांगी गई थी, लेकिन इसे तृतीय पक्ष का मामला बताते हुए आवेदन अस्वीकार कर दिया गया। इसके बाद प्रथम अपील अपर कलेक्टर जगदलपुर के समक्ष प्रस्तुत की गई, जहां सुनवाई के बाद जनसूचना अधिकारी को दस्तावेज उपलब्ध कराने का आदेश दिया गया। आदेश के पालन में 1 फरवरी 2026 को संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराए गए, जिनसे अनियमितताओं का खुलासा हुआ।

प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार हाउस फादर पद पर चयनित अभ्यर्थी किशन बघेल द्वारा रसोइया के पद का अनुभव प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया गया है। प्रमाण पत्र में उल्लेख है कि वह 28 जुलाई 2016 से शासकीय प्लेस ऑफ सेफ्टी, जगदलपुर में रसोइया के पद पर कार्यरत हैं। जबकि भर्ती नियमों के अनुसार हाउस फादर पद के लिए बाल संरक्षण, पुनर्वास एवं बाल कल्याण से संबंधित संस्थाओं में कम से कम दो वर्ष का अनुभव आवश्यक है। इसके बावजूद उक्त अनुभव को मान्य करते हुए अभ्यर्थी को 10 अंक प्रदान कर मेरिट सूची में प्रथम स्थान दिया गया और नियुक्ति कर दी गई।

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि परामर्शदाता एवं स्टोर कीपर सह लेखापाल पदों पर चयनित अभ्यर्थियों के अनुभव प्रमाण पत्रों में भी अनियमितता की संभावना है, जिसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि चयन समिति के जिम्मेदार अधिकारियों ने नियमों की अनदेखी करते हुए निहित स्वार्थ में अयोग्य अभ्यर्थियों का चयन किया।

इस संबंध में पत्र क्रमांक 8381 दिनांक 25 फरवरी 2026 के माध्यम से कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी, जगदलपुर को विस्तृत दस्तावेजी शिकायत प्रस्तुत की गई थी, जिसमें अयोग्य अभ्यर्थी को सेवा से पृथक कर प्रतीक्षा सूची से योग्य अभ्यर्थी की नियुक्ति करने तथा अन्य पदों की जांच कराने की मांग की गई थी। इसके बाद 25 मार्च 2026 को स्मरण पत्र भी प्रेषित किया गया, जिसकी 30 मार्च को प्राप्ति होने के बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

भर्ती नियमों के अनुसार प्रतीक्षा सूची से नियुक्ति जून 2026 तक ही की जा सकती है। ऐसे में समय रहते कार्रवाई नहीं होने पर योग्य अभ्यर्थियों का अवसर समाप्त हो सकता है। इसे लेकर शिकायतकर्ता ने 9 अप्रैल 2026 को मुख्यमंत्री कार्यालय में भी शिकायत दर्ज कराई है और 30 दिनों के भीतर कार्रवाई की मांग की है। मामले की प्रति कमिश्नर कार्यालय, जगदलपुर बस्तर संभाग को भी भेजी गई है।

इस पूरे प्रकरण ने शासन की जीरो टॉलरेंस नीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि उच्च स्तर पर इस मामले में क्या कार्रवाई होती है और दोषियों पर कब तक जिम्मेदारी तय की जाती है।

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