छत्तीसगढ़ (आधार स्तंभ) : छत्तीसगढ़ के रायपुर बलौदाबाजार के अलावा सुकमा में मध्याह्न भोजन के दौरान बरती गई लापरवाही बच्चों के लिए घातक हो सकती है। इन घटनाओं पर हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया था, जिसके बाद अब मुख्य सचिव ने सभी विभागाध्यक्षों के लिए खाद्य सुरक्षा प्रोटोकाल जारी किया है। इसमें निर्देशों का परिपालन न करने की स्थिति में कार्रवाई भी तय की गई है।
बता दें कि 17 सितंबर को चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए 26 अगस्त को आदेश पारित कर भोजन परोसने में सावधानी तथा सुरक्षा बरतने के संबंध में निर्देश दिए थे। इसके मद्देनजर मुख्यसचिव ने प्रिंसिपल सेक्रेटरी से लेकर प्रदेशभर के कलेक्टर, एसपी व आला अफसरों को लिख में पत्र में डिवीजन बेंच के निर्देश का उल्लेख करते हुए लिखा है।
रसोईघर और भंडार कक्षों का निरीक्षण नियमित अंतराल पर नामित अधिकारियों द्वारा किया जाएगा।
- आवासीय विद्यालयों, बड़े छात्रावासों की रसोई व भोजन क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरे लगाना, औचक निरीक्षण।
- भोजन सुरक्षा, स्वच्छता और रसोई संचालन पर स्वयंपाकी, सहायकों व कर्मचारियों को प्रशिक्षण।
- शिक्षकों व कर्मचारियों को संदिग्ध गतिविधियों की तुरंत रिपोर्ट करने के लिए जागरूक करना।
- छात्रावास-विद्यालय में प्राथमिक चिकित्सा किट और ज़रूरी दवाएं उपलब्ध।
- आपातकालीन स्वास्थ्य सहायता के लिए नज़दीकी स्वास्थ्य केंद्र से समन्वय।
- आपात स्थिति में आपदा प्रबंधन/मॉक ड्रिल।
- सामुदायिक और अभिभावकों की भागीदारी, पालक-शिक्षक बैठकें नियमित।
- जिला स्तर पर अभिभावक-शिक्षक समिति का गठन व समीक्षा।
- भोजन को दूषित करने की घटना पर तुरंत पुलिस को सूचना।
- भोजन की गुणवत्ता-सुरक्षा से संबंधित जानकारी के लिए हेल्पलाइन-शिकायत तंत्र।
- हर घटना, चाहे छोटी हो या बड़ी, जिला शिक्षा अधिकारी व कलेक्टर को रिपोर्ट करना।
- खाद्य सुरक्षा अधिकारियों द्वारा मध्यान्ह भोजन-छात्रावास भोजन योजनाओं का त्रैमासिक, अर्धवार्षिक व वार्षिक ऑडिट।



