मौत का ‘ट्रांसफार्मर पोल’ और ‘लटकते तार’, ग्रामीण जानमाल के खतरे में

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कोरबा- बलगी/भैरोताल(आधार स्तंभ) :  छत्तीसगढ़ स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड (सीएसईबी) वितरण और पारेषण विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की घोर लापरवाही के कारण आमजनों पर कभी भी एक बड़ा खतरा मंडरा सकता है एक ओर जहां स्मार्ट मीटर लगाए जाने के बाद से बिजली के बिल में भारी वृद्धि की शिकायतें लगातार आ रही हैं, वहीं दूसरी ओर विभाग की लचर व्यवस्था ने गंभीर दुर्घटनाओं को खुला आमंत्रण दे दिया है ।

यह सनसनीखेज मामला सीएसईबी दर्री मंडल के अंतर्गत आने वाले ग्राम डंगनियाखार और भैरोताल से सामने आया है चौंकाने वाली बात यह है कि स्थानीय लाइनमैन और सहायक अभियंता से इस संबंध में एक साल पूर्व ही शिकायतें की जा चुकी हैं, लेकिन विभाग ने अब तक आँखें मूँद रखी हैं ।

⚡️ प्रमुख खतरे के बिंदु

  • डंगनियाखार का क्रैक पोल:
  • डंगनियाखार में ट्रांसफार्मर के लिए लगाया गया पोल पूरी तरह से क्रैक (टूट चुका) है ।
  • यह पोल केवल एक एक्सटेंशन तार के सहारे रुका हुआ है, जो कभी भी भरभरा कर गिर सकता है इससे न केवल बड़ी जनहानि हो सकती है, बल्कि बिजली आपूर्ति भी कई दिनों तक बाधित हो जाएगी ।
    भैरोताल में लटकते केबल:
  • भैरोताल में बिजली का केबल खतरनाक तरीके से लटक रहा है, जिसकी ऊंचाई जमीन से मुश्किल से 6 फीट है यह मानक सुरक्षा मानदंडों का खुला उल्लंघन है और राहगीरों के लिए सीधा खतरा है ।
    बलगी मोड़ पर जानलेवा जाल:
  • बलगी मोड़ पर घरेलू कनेक्शन का तारों का एक जाल जमीन को छू रहा है ।
    ठीक सामने एक स्कूल संचालित है, जिससे बच्चों और आम नागरिकों के करेंट की चपेट में आने का गंभीर खतरा बना हुआ है ।

स्थानीय लाइनमैन और विभाग के कर्मचारी इन जानलेवा खतरों को देखते हुए भी अंधे बने बैठे हैं जिससे ऐसा प्रतीत होता है कि वे किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहे हैं ।

जन अधिकार मंच ने दी आंदोलन की चेतावनी

जन अधिकार मंच के संयोजक सपुरन कुलदीप ने विद्युत विभाग की इस आपराधिक लापरवाही की कड़े शब्दों में निंदा की है उन्होंने तत्काल इन सभी खतरों को सुधारने की सख्त मांग की है ।

उन्होंने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा है कि:

यदि दो दिनों के भीतर इन समस्याओं का सुधार नहीं किया गया, तो उच्चाधिकारियों से इसकी शिकायत की जाएगी और जरूरत पड़ने पर जन अधिकार मंच आंदोलन की राह पर जाने के लिए बाध्य होगा ।

ग्रामीणों का कहना है कि एक तरफ सरकारें सुरक्षित बिजली आपूर्ति के बड़े-बड़े दावे करती हैं, वहीं दूसरी ओर मैदानी अमला अपनी कर्तव्यों का सही ढंग से पालन नहीं कर रहा है, जिससे आम जनता की जान को खतरा हो रहा है ।
यह खबर स्थानीय प्रशासन और सीएसईबी के वरिष्ठ अधिकारियों के लिए एक रेड अलर्ट है, जिस पर तत्काल संज्ञान लिया जाना अत्यंत आवश्यक है ।

 

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