बड़ी मछलियों का शिकार करना न पुलिस के बस की बात, न सीआईएसएफ के
कोरबा/दीपका (आधार स्तम्भ) । एसईसीएल के गेवरा, दीपका और कुसमुंडा खदानों में डीजल चोर जमकर आतंक मचा रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक इनके आतंक से अब डंपर डोजर और सावेल में कार्य करने वाले कर्मचारी थर्राने लगे हैं. जानकारों के अनुसार सीआईएसएफ की भूमिका सबसे ज्यादा संदेहास्पद हैं चौक चौराहों पर इनके द्वारा आए दिन पांच दस लीटर डीजल पकड़कर अपने कर्तव्यों का इति श्री कर ली जाती है, जबकि माफियाओं पर हाथ डालने से इनका भी हांथ कांपता है। कुल मिलाकर बड़ी मछलियों का शिकार करना न पुलिस के बस की बात है न सीआईएसएफ की।
डीजल चोरों के आतंक से इन सबके बीच अब एसईसीएल कर्मचारियों जान आफत में पड़ गई है खासकर उन कर्मचारियों की जो डंपर डोजर और सावेल में कार्य करते हैं डीजल चोरों का आतंक इतना बढ़ गया है कि वह किसी की परवाह नहीं करते अकेला कर्मचारी किसी वाहन पर अगर मौजूद है तो डीजल चोरों का गैंग उस पर हमला कर दे रहा है एसईसीएल की भारी-भरकम वाहनों को भी इनके द्वारा क्षति पहुंचाई जा रही है इसके बावजूद एसईसीएल प्रबंधन श्रमिक नेता और प्रशासन का मौन रहना संदेह को जन्म देता है।
बीती रात एसईसीएल के दीप का कोयला खदान में रात्रि पाली में डीजल चोरों ने वहां खड़े दो डंपर पर पहले पथराव किया और बाद में बड़े-बड़े जेरकीन में डीजल चोरी कर भाग खड़े हुए इस दौरान डंपर के कांच टूटने से एक डंपर ऑपरेटर घायल हो गया है जिसकी इलाज नेहरू शताब्दी चिकित्सालय में जारी है दरअसल एसईसीएल कर्मचारी जो डंपर ऑपरेटर हैं अनुराग और हीरालाल यादव डंपर क्रमांक 586 और 578 लगभग 3:45 बजे रात्रि पाली में 229 नंबर सावेल के जंक्शन के पास पहुंचे ही थे कि अचानक चोरों ने उन पर हमला कर दिया। डीजल चोरों के पथराव से डंपर के कांच टूट गए और केबिन में मौजूद डंपर ऑपरेटर गंभीर रूप से घायल हो गया घटना की सूचना प्रबंधन को मिलते ही एरिया पर्सनल मैनेजर श्री दुबे मौके पर पहुंचे उसके पश्चात कोयला प्रोडक्शन चालू हो गया दरअसल घटना के बाद ऑपरेटरों ने अपनी वाहन खड़ी कर दी थी और प्रोडक्शन बंद कर दिया था। उक्त घटना की जानकारी देते हुए क्षेत्रीय सुरक्षा समिति के सदस्य फैयाज अंसारी ने बताया कि अब कोयला खदान में रात्रि पाली में कार्य करना मतलब अपने जान से खिलवाड़ करना होगा प्रबंधन करोड़ों रुपए प्रतिमाह खर्च करके भी सीआईएसएफ की तैनाती के बावजूद डीजल चोरों पर अंकुश लगाने में असमर्थ है।



