छत्तीसगढ़ में दावों की खुली पोल: पानी की भारी किल्लत, जंग लगी थालियों में बच्चों को परोसा जा रहा मध्याह्न भोजन, सिस्टम पर उठे सवाल

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मोहतरा(आधार स्तम्भ) :  एक ओर सरकारें शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने, बच्चों को बेहतर सुविधाएं देने और मध्याह्न भोजन जैसी योजनाओं के माध्यम से उनके पोषण स्तर को सुधारने के बड़े-बड़े दावे करती हैं, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत इन दावों की सच्चाई उजागर कर रही है। साजा जनपद के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत मोहतरा में संचालित प्राथमिक एवं मिडिल स्कूल की स्थिति बेहद चिंताजनक और लापरवाही से भरी हुई सामने आई है, जहां बच्चों के स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं के साथ गंभीर खिलवाड़ किया जा रहा है। यहां दो प्रमुख समस्याएं लंबे समय से बनी हुई हैं—पहली, पानी की गंभीर किल्लत और दूसरी, गंदगी व जंग से भरी थालियों में बच्चों को मध्याह्न भोजन परोसा जाना, जो सीधे तौर पर उनके स्वास्थ्य को खतरे में डाल रहा है।

स्कूल परिसर में पेयजल की व्यवस्था पूरी तरह से ठप पड़ी हुई है। जानकारी के अनुसार, यहां लगा हैंडपंप लंबे समय से खराब है और उसकी मरम्मत तक नहीं कराई गई है। परिणामस्वरूप, स्कूल प्रबंधन और बच्चों को पानी के लिए दूसरे स्थानों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। पंचायत द्वारा अस्थायी रूप से पानी उपलब्ध कराने की कोशिश जरूर की जा रही है, लेकिन वह भी करीब डेढ़ किलोमीटर दूर से लाकर पूरी की जा रही है, जो न तो व्यावहारिक है और न ही स्थायी समाधान। पानी की इस कमी का सीधा असर स्कूल की साफ-सफाई और विशेष रूप से बर्तनों की धुलाई पर पड़ रहा है, जिससे स्थिति और भी गंभीर हो गई है।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इसी पानी की कमी के कारण बच्चों को जिन थालियों में भोजन कराया जा रहा है, वे पूरी तरह से जंग लगी और गंदगी से भरी हुई हैं। इन थालियों की हालत इतनी खराब है कि उनमें खाना खाना बच्चों के स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। वीडियो और मौके पर सामने आई तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि थालियों में जंग की परत जमी हुई है, जिसे ठीक से साफ नहीं किया जा रहा है। बच्चों ने खुद बताया कि कई बार वे ही इन थालियों को धोते हैं, लेकिन पानी की कमी के कारण उन्हें ठीक से साफ नहीं कर पाते।

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या छोटे-छोटे बच्चों से इस तरह का काम कराना उचित है, और क्या यह उनकी सुरक्षा और स्वच्छता के मानकों के अनुरूप है? इस पूरे मामले में स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी खुलकर नाराजगी जताई है और स्कूल प्रबंधन पर सीधा आरोप लगाया है कि यह पूरी स्थिति उनकी लापरवाही का परिणाम है। उनका कहना है कि बच्चों को स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण में भोजन उपलब्ध कराना स्कूल प्रबंधन की प्राथमिक जिम्मेदारी है, लेकिन यहां उस जिम्मेदारी को पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है। जनप्रतिनिधियों का यह भी कहना है कि नई थालियां उपलब्ध होने की बात कही जा रही है, लेकिन उन्हें बच्चों तक पहुंचाने में जानबूझकर लापरवाही बरती जा रही है, जिससे यह संदेह और गहरा हो जाता है कि कहीं न कहीं व्यवस्था में गंभीर खामियां हैं।

ग्रामीणों और अभिभावकों में इस पूरे मामले को लेकर गहरा आक्रोश देखा जा रहा है। उनका कहना है कि वे अपने बच्चों को स्कूल इसलिए भेजते हैं ताकि उन्हें बेहतर शिक्षा के साथ-साथ सुरक्षित और पौष्टिक भोजन मिल सके, लेकिन यहां की स्थिति उनके भरोसे को तोड़ रही है। बच्चों को जंग लगी थालियों में भोजन कराना और पीने के पानी जैसी मूलभूत सुविधा तक उपलब्ध न कराना न केवल प्रशासनिक विफलता है, बल्कि यह बच्चों के अधिकारों का भी उल्लंघन है।

अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर इतनी गंभीर समस्याओं के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी अब तक मौन क्यों हैं? क्या शिकायतों के बावजूद भी कार्रवाई नहीं होना किसी बड़ी लापरवाही या संरक्षण की ओर इशारा करता है? और सबसे अहम सवाल—क्या मोहतरा के बच्चों को कब तक इसी तरह अस्वच्छ और असुरक्षित परिस्थितियों में भोजन करना पड़ेगा?

फिलहाल, मोहतरा का यह स्कूल व्यवस्था की खामियों और प्रशासनिक उदासीनता का जीता-जागता उदाहरण बन चुका है, जहां सुधार की सख्त जरूरत है और अब निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

इस पूरे मामले में स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी खुलकर नाराजगी जताई है और स्कूल प्रबंधन पर सीधा आरोप लगाया है कि यह पूरी स्थिति उनकी लापरवाही का परिणाम है। उनका कहना है कि बच्चों को स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण में भोजन उपलब्ध कराना स्कूल प्रबंधन की प्राथमिक जिम्मेदारी है, लेकिन यहां उस जिम्मेदारी को पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है। जनप्रतिनिधियों का यह भी कहना है कि नई थालियां उपलब्ध होने की बात कही जा रही है, लेकिन उन्हें बच्चों तक पहुंचाने में जानबूझकर लापरवाही बरती जा रही है, जिससे यह संदेह और गहरा हो जाता है कि कहीं न कहीं व्यवस्था में गंभीर खामियां हैं।

ग्रामीणों और अभिभावकों में इस पूरे मामले को लेकर गहरा आक्रोश देखा जा रहा है। उनका कहना है कि वे अपने बच्चों को स्कूल इसलिए भेजते हैं ताकि उन्हें बेहतर शिक्षा के साथ-साथ सुरक्षित और पौष्टिक भोजन मिल सके, लेकिन यहां की स्थिति उनके भरोसे को तोड़ रही है। बच्चों को जंग लगी थालियों में भोजन कराना और पीने के पानी जैसी मूलभूत सुविधा तक उपलब्ध न कराना न केवल प्रशासनिक विफलता है, बल्कि यह बच्चों के अधिकारों का भी उल्लंघन है।

अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर इतनी गंभीर समस्याओं के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी अब तक मौन क्यों हैं? क्या शिकायतों के बावजूद भी कार्रवाई नहीं होना किसी बड़ी लापरवाही या संरक्षण की ओर इशारा करता है? और सबसे अहम सवाल—क्या मोहतरा के बच्चों को कब तक इसी तरह अस्वच्छ और असुरक्षित परिस्थितियों में भोजन करना पड़ेगा?

फिलहाल, मोहतरा का यह स्कूल व्यवस्था की खामियों और प्रशासनिक उदासीनता का जीता-जागता उदाहरण बन चुका है, जहां सुधार की सख्त जरूरत है और अब निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

बच्ची की बाइट ने खोली स्कूल की सच्चाई

मोहतरा के प्राथमिक एवं मिडिल स्कूल की बदहाल व्यवस्था की पोल खुद बच्चों ने खोल दी है। कक्षा सातवीं की छात्रा दिव्यानी बघेल ने साफ शब्दों में बताया कि उन्हें रोजाना जंग लगी और गंदी थालियों में भोजन करना पड़ता है। दिव्यानी के अनुसार, “थाली में जंग लगा रहता है और हमारे यहाँ पानी की बहुत कमी है, जिसके कारण थाली को ठीक से धो नहीं पाते हैं। हम लोग खुद ही अपनी थाली धोते हैं, स्कूल वाले नहीं धोते हैं।

बच्ची ने यह भी आरोप लगाया कि जब अधिकारी निरीक्षण के लिए आते हैं, तब कुछ समय के लिए व्यवस्था सुधरी हुई दिखाई जाती है। “जब अधिकारी आते हैं तो हमें बैठाकर ठीक तरीके से खाना खिलाया जाता है, लेकिन जैसे ही अधिकारी चले जाते हैं, फिर पहले जैसी ही स्थिति हो जाती है,” दिव्यानी ने बताया।

दिव्यानी ने आगे बताया कि सभी बच्चे लाइन लगाकर खाना लेते हैं, लेकिन थालियों की साफ-सफाई ठीक नहीं होने के कारण उन्हें गंदगी में ही भोजन करना पड़ता है। यही नहीं, स्कूल में वॉशरूम की स्थिति भी बेहद खराब है। “वॉशरूम भी ठीक नहीं है,” बच्ची ने अपनी समस्या बताते हुए कहा।

छात्रा दिव्यानी बघेल की इस बाइट ने स्कूल की वास्तविक स्थिति को उजागर कर दिया है, जिससे साफ है कि बच्चों को न तो स्वच्छ भोजन मिल पा रहा है और न ही बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं। यह स्थिति न केवल प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाती है, बल्कि बच्चों के स्वास्थ्य और भविष्य के साथ गंभीर खिलवाड़ भी साबित हो रही है।

प्रबंधन का पक्ष: व्यवस्थाएं पूर्व से खराब थीं, सुधार के लिए प्रयास जारी”

मोहतरा के प्राथमिक एवं मिडिल स्कूल में सामने आई गंभीर समस्याओं को लेकर जब स्कूल प्रबंधन से सवाल किया गया, तो जिम्मेदार ने अपनी सफाई देते हुए कहा कि पानी, वाशरूम और जंग लगी थालियों की समस्या नई नहीं है, बल्कि यह पूर्व से चली आ रही व्यवस्था का परिणाम है। उन्होंने बताया कि उन्हें इस स्कूल में पदस्थ हुए अभी लगभग एक माह ही हुआ है और जो भी अव्यवस्थाएं हैं, वे पहले से ही मौजूद थीं।

अधिकारी के अनुसार, पदभार ग्रहण करने के बाद उन्होंने इन समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए एक समिति की बैठक आयोजित की और व्यवस्थाओं को सुधारने के लिए करीब पचास नई थालियों की व्यवस्था भी की है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान में सत्र समाप्ति का समय चल रहा है और यदि नई थालियों का उपयोग अभी किया जाता है और बाद में उन्हें रख दिया जाता है, तो अगले दो महीनों में वे भी खराब स्थिति में पहुंच सकती हैं, इसी वजह से फिलहाल पुराने बर्तनों का ही उपयोग जारी रखने का निर्णय लिया गया है।

वाशरूम की खराब स्थिति को लेकर हेड मास्टर विजय बहादुर शासकीय पूर्व माधमिक शाला मोहतरा स्वीकार किया कि शौचालय की स्थिति पहले से ही जर्जर है और उसके दरवाजे भी पुराने टूटे हुवे हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि आने वाले सत्र में इन समस्याओं को सुधारने के लिए प्रयास किए जाएंगे, ताकि बच्चों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। वहीं पानी की समस्या को लेकर उन्होंने बताया कि स्कूल में स्थायी जल स्रोत नहीं होने के कारण दूर से पानी लाना पड़ता है और एक नल के माध्यम से काम चलाया जा रहा है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि हाल ही में उन्होंने सिंचाई विभाग में बोर खनन के लिए आवेदन दिया है, लेकिन अभी तक प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है।

लगातार प्रयास कर रहे हैं और आने वाले सत्र में पानी, वाशरूम और बर्तनों से जुड़ी सभी समस्याओं को दूर करने का लक्ष्य है, ताकि स्कूल में किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न रहे। हालांकि, मौजूदा हालात को देखते हुए यह सवाल अभी भी बना हुआ है कि जब समस्याएं पहले से थीं, तो अब तक उनके समाधान के लिए ठोस और त्वरित कदम क्यों नहीं उठाए गए, और बच्चों को फिलहाल इस स्थिति में क्यों रहने दिया जा रहा है।

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