कोरबा में माल गाड़िओं का बोलबाला, यात्री सुविधाएं नहीं पहुंच पाई अपेक्षित स्तर तक, लंबी दूरी की ट्रेनों का अभाव यात्रियों के लिए बड़ी परेशानी बना हुआ है

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कोरबा (आधार स्तम्भ) : दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (एसईसीआर) की आय में कोरबा की भूमिका लगातार अहम बनी हुई है। बीते वित्त वर्ष की तरह 2025-26 में भी माल परिवहन के क्षेत्र में एसईसीआर ने नया रिकॉर्ड बनाया है, जिसमें कोरबा का सबसे बड़ा योगदान रहा। खासकर कोयला परिवहन से रेलवे को भारी राजस्व प्राप्त हो रहा है, लेकिन इसके बावजूद यहां यात्री सुविधाएं अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाई हैं।

कोरबा का रेलवे से करीब 65 साल पुराना नाता है, लेकिन सुविधाओं की स्थिति आज भी किसी नए स्टेशन जैसी नजर आती है। प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक शहरों में शामिल कोरबा में देशभर से लोग रोजगार के लिए आते हैं, फिर भी लंबी दूरी की ट्रेनों का अभाव यात्रियों के लिए बड़ी परेशानी बना हुआ है।

वर्तमान में कोरबा से हसदेव एक्सप्रेस (रायपुर), छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस (अमृतसर), शिवनाथ एक्सप्रेस (नागपुर) और लिंक एक्सप्रेस (विशाखापट्टनम) जैसी सीमित ट्रेन सेवाएं ही उपलब्ध हैं। इसके अलावा राजधानी और न्यायधानी को जोड़ने वाली मेमू व पैसेंजर ट्रेनें संचालित हो रही हैं।

रेल सेवा की शुरुआत वर्ष 1959-60 में होने के बावजूद कोरबा को अब तक कटनी रूट से सीधा रेल कनेक्शन नहीं मिल सका है। वहीं रायगढ़ रूट को जोड़ने वाली बालपुर–सारागांव रेल लाइन बने करीब 9 साल हो चुके हैं, लेकिन इस मार्ग पर अब तक यात्री ट्रेनों का संचालन शुरू नहीं हो पाया है।

इस संबंध में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे बिलासपुर के वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक अनुराग कुमार सिंह ने बताया कि नई यात्री ट्रेनों के संचालन और विस्तार के लिए रेलवे बोर्ड की मंजूरी आवश्यक होती है। उन्होंने कहा कि कोरबा में यात्री सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

स्थानीय लोगों की राय भी सामने आई है

शहर के व्यापारी रमेश अग्रवाल का कहना है, “कोरबा से रेलवे को सबसे ज्यादा आय मिलती है, लेकिन सुविधाएं बहुत कम हैं। लंबी दूरी की ट्रेनों की सख्त जरूरत है, ताकि व्यापार और आवागमन दोनों आसान हो सके।”

नौकरीपेशा सविता यादव ने कहा :

“हमें अक्सर रायपुर या बिलासपुर जाकर ट्रेन पकड़नी पड़ती है। अगर कोरबा से ही अधिक ट्रेनों की सुविधा मिले तो समय और पैसे दोनों की बचत होगी।”

छात्र अमित कुमार का कहना है : 

“पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बाहर जाना पड़ता है, लेकिन सीधी ट्रेन नहीं होने से काफी परेशानी होती है। रेलवे को युवाओं की जरूरतों को ध्यान में रखना चाहिए।”

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब रेलवे को कोरबा से सर्वाधिक आय प्राप्त हो रही है, तो उसी अनुपात में यहां यात्री सुविधाओं और ट्रेन सेवाओं का विस्तार भी किया जाना चाहिए।साथ ही काफी महीने से लिफ्ट पारिसेवा बंध पड़ा हैं,जिससे बुज़ुर्ग यात्रीओं  को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।यात्रियों को अब रेलवे से बेहतर सुविधाओं और नई ट्रेनों की सौगात का इंतजार है।

 

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