कोरबा(आधार स्तंभ) : छत्तीसगढ़ शासन की मंशा अनुरूप प्रत्येक किसान का वैध धान खरीदी करने के लिए कोरबा जिले में भी कलेक्टर अजीत बसंत के सतत मार्गदर्शन और निर्देशन में कार्रवाई जारी है। धान उपार्जन केंद्रों में तमाम व्यवस्थाओं के मध्य किसान सुचारू रूप से अपना धान बेच सकें, इसके लिए लगातार निर्देश देने के साथ-साथ दौरे भी किये जा रहे हैं।
इस बीच उपार्जन केंद्र पिपरिया को लेकर किसानों में नाराजगी सामने आई है कि यहां उन्हें अपना धान बचने के लिए हमाली तक करनी पड़ रही है। अपना नाम उजागर ना करने करने की शर्त पर किसानों ने बताया कि वह अपने वाहनों में धान लेकर उपार्जन केंद्र तक पहुंचाते हैं तो यहां के हमाल उनका धान गाड़ी से उतारते नहीं।।किसानों को खुद ही मजदूर लगवा कर धान उतरवाना पड़ता है छल्ली लगाने के साथ धान की ढाल करने के पश्चात सिलाई का भी काम उन्हें ही कराना पड़ रहा है। इस अव्यवस्था को लेकर किसानों ने अपनी बात रखनी चाही तो उन्हें कोई संतोषप्रद जवाब नहीं मिल सका। प्रबंधक किसी कार्यवश जिला मुख्यालय आए हुए थे।
किसानों का कहना है कि वह अपना ध्यान जल्द से जल्द बेचकर घर लौटने के लिए 1000-1500 रुपए खर्च कर देते हैं लेकिन जब सरकार ने व्यवस्था दी है, उपार्जन केंद्रों में हमालों की व्यवस्था की गई है तो किसानों से काम नहीं कराना चाहिए, फिर आखिर निर्देश का क्या औचित्य?
इस विषय पर जब पिपरिया उपार्जन केंद्र के प्रबंधक विजय कुमार साहू से बात की गई तो उन्होंने कहा कि यहां ज्यादा खरीदी नहीं होती। 8-10 हमाल रखे गए हैं। आने वाले किसानों के द्वारा भी कार्य किया जाता है। मजदूरी के सवाल पर पहले तो टाला, किन्तु फिर कहा कि हमालों को 10-12 रुपए प्रति क्विंटल धान की दर से भुगतान किया जाता है। इतना कहकर उन्होंने फोन काट दिया। फिलहाल पिपरिया उपार्जन केंद्र के किसान चाहते हैं कि उनसे हमाल का काम ना कराया जाय।

