कोरबा(आधार स्तंभ) : कोरबा जिले के कटघोरा और कोरबा वन मंडल में विचरण कर रहे हाथियों की ट्रेकिंग करने से लेकर उनकी आवाजाही जानने में वन अमला नाकाम साबित हो रहा है। हाथियों की खूनी रफ्तार बढ़ती जा रही है और 3 दिन के भीतर तीन ग्रामीणों की मौत हो चुकी है। आज भोर में करीब 5 बजे एक हाथी ने कोरबा वन मंडल के अंतर्गत ग्राम गौरबोरा में ग्रामीण को दौड़कर पकड़ा और उठाकर पटक दिया। घटना से गांव में शोक मिश्रित आक्रोश व्याप्त है।
कटघोरा वन मंडल के चैतमा और बिंझरा में दो महिलाओं की जान हाथी के द्वारा ली जा चुकी है। कोरबा वन मंडल में भी हाथियों का एक अन्य दल विचरण कर रहा है जिसमें शामिल एक हाथी ने शुक्रवार तड़के ग्रामीण महेंद्र सिंह पर हमला कर दिया।
महेन्द्र सिंह मंझवार ग्राम गौरबोरा ग्राम पंचायत अजगर बहार, वन परिक्षेत्र बालको का निवासी था। जंगल की ओर से आया एक हाथी ग्रामीण के घर के आंगन में मौजूद धान को सुबह करीब 5 बजे खा रहा था। कुछ आहट महसूस होने पर महेंद्र सिंह देखने के लिए आंगन की ओर आया तो हाथी नजर आने पर उससे बचकर भागने लगा। ग्रामीण को देखकर हाथी भी उसके पीछे-पीछे हो लिया और उसे दौड़ाते हुए घर के छप्पर और लकड़ी के बेड़ा को तोड़ते हुए गांव की सड़क तक जा पहुंचा। हाथी से बचने के लिए ग्रामीण एक कोने में दुबका रहा लेकिन हाथी ने सड़क किनारे दुबके इस ग्रामीण को सूंड़ में लपेटकर उठाया और सड़क पर पटक दिया। मौके पर ही महेंद्र की दर्दनाक मौत हो गई। इसके बाद हाथी वहां से चला गया। भोर के उजाले में हुई इस घटना ने ग्रामवासियों में दहशत के साथ-साथ वन विभाग के कामकाज के प्रति नाराजगी फैला दी।
गौरतलब है कि कटघोरा और कोरबा वन मंडल में हाथियों की आवाजाही लगातार महीनों से बनी हुई है। वन विभाग के अधिकारी और मैदानी अमला बड़े-बड़े दावे करते नहीं थकते की ड्रोन सिस्टम से तो कभी जीपीएस से तो कभी अन्य संसाधनों से हाथियों की निगरानी की जा रही है लेकिन हाथियों की ट्रेसिंग में कहीं ना कहीं बड़ी चूक होने के कारण यह ग्रामीणों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। घरों और फसलों को नुकसान करने के साथ-साथ हाथी अब आतंकी होते जा रहे हैं। ग्रामीणों की मौत पर मुआवजा का मरहम लगाकर वन विभाग के अधिकारी अपना पल्ला झाड़ देते हैं लेकिन जो दर्द आतंकी हाथी उस परिवार के लिए छोड़ जाते हैं, उसे आखिर कौन समझेगा?

