अहमदाबाद (आधार स्तंभ) : अहमदाबाद से लंदन जाने वाली एयर इंडिया की फ्लाइट 12 जून को क्रैश हुई। इस हादसे ने सभी को झकझोर कर रख दिया था। इस विमान दुर्घटना में कम से कम 270 लोग मारे गए थे। इस क्रैश के एक महीने के बाद अब जांच की रिपोर्ट सामने आई है। इस रिपोर्ट में कई अहम खुलासे हुए हैं।
हादसे से पहले पायलट में क्या बात हुई?
इस रिपोर्ट में सामने आया है कि पायलटों के बीच फ्यूल बंद करने को लेकर कंफ्यूजन हुई। एयर इंडिया की फ्लाइट 171 के दोनों इंजनों को फ्यूल देने वाले दोनों स्विच बंद हो गए थे, जिसके बाद पायलट असमंजस में पड़ गए थे और विमान उड़ान भरने के कुछ ही सेकंड बाद अहमदाबाद में क्रैश हो गया। कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डिंग में एक पायलट को दूसरे से यह पूछते हुए सुना गया कि तुमने फ्यूल क्यों कट ऑफ किया? दूसरे पायलट ने जवाब दिया कि मैंने ऐसा नहीं किया।
फ्यूल का यह कटऑफ हो जाना, जिसके चलते विमान को फ्यूल मिलना बंद हो गया, 12 जून को बोइंग ड्रीमलाइनर 787-8 में जो कुछ हुआ, इस गुत्थी को सुलझाने में अहम रोल निभा सकता है, साथ ही यह क्रैश की बड़ी वजह बनकर भी सामने आ सकता है। दोनों पायलट की बातचीत के बाद सवाल ये है कि आखिर फ्यूल स्विच किसने बंद किया?
फ्यूल को दोबारा RUN किया गया
इसी के बाद रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि पायलटों ने फ्यूल बंद होने की कंफ्यूजन के बाद एक बार फिर कट ऑफ से उसको रन पर स्विच किया। लंदन जाने वाले विमान के दोनों इंजनों के स्विच कटऑफ से रन पर स्विच किए गए, जिससे पता चलता है कि पायलटों ने हालात को संभालने की कोशिश की, जैसा कि एन्हांस्ड एयरबोर्न फ़्लाइट रिकॉर्डर (EAFR) के आंकड़ों से पता चलता है।
रिपोर्ट में कहा गया, जब विमान हवा में होता है, तो ईंधन नियंत्रण स्विच को कटऑफ से रन पर ले जाया जाता है। जिस समय विमान ने उड़ान भरी, को-पायलट विमान उड़ा रहे थे, जबकि कैप्टन मॉनिटिरिंग कर रहे थे। रिपोर्ट में कहा गया है, विमान ने लगभग 180 नॉट्स IAS की स्पीड पर था और उसके तुरंत बाद, इंजन 1 और इंजन 2 का फ्यूल कटऑफ स्विच से 1 सेकेंड के अंदर ही अंदर एक के बाद एक RUN से CUTOFF हो गए। रिपोर्ट के अनुसार, इंजन N1 और N2 का फ्यूल बंद हो जाने की वजह से उनकी क्षमता में गिरावट आनी शुरू हो गई।
पायलट ने जारी किया अलर्ट
विमान ने 1 बजकर 38 मिनट पर उड़ान भरी थी। 1 बजकर 39 मिनट पर पायलट ने MAYDAY MAYDAY MAYDAY का अलर्ट जारी किया। रिपोर्ट में कहा गया, एटीसीओ (एयर ट्रैफिक कंट्रोलर) ने कॉल साइन के बारे में पूछताछ की। एटीसीओ को कोई जवाब नहीं मिला, लेकिन उन्होंने विमान को एयरपोर्ट की सीमा के बाहर क्रैश होते देखा और इमरजेंसी प्रतिक्रिया सक्रिय कर दी।
विमान हुआ क्रैश
विमान जाकर बीजे मेडिकल कॉलेज के होस्टल में क्रैश हो गया। इस भयानक क्रैश में विमान में सवार यात्रियों की मौत तो हूं ही, साथ ही होस्टल में मौजूद छात्रों की भी इस हादसे में जान चली गई। विमान में मौजूद 242 में से 241 लोगों की मौत हो गई। वहीं, साथ ही होस्टल में मौजूद 30 छात्रों ने भी इस हादसे में दम तोड़ दिया।
कौन थे दोनों पायलट?
विमान को कैप्टन सुमीत सभरवाल चला रहे थे। जो एक लाइन ट्रेनिंग कैप्टन हैं और जिनके पास 8,200 घंटे उड़ान का अनुभव है। उनके साथ फर्स्ट ऑफिसर क्लाइव कुंदर भी थे, जिन्होंने 1,100 घंटे उड़ान का अनुभव हासिल किया था। रिपोर्ट में कहा गया है कि दोनों पायलट मेडिकल रूप से स्वस्थ थे।
रिपोर्ट में बताया गया कि उड़ान भरने के तुरंत बाद रैम एयर टर्बाइन (आरएटी) को तैनात कर दिया गया था, जैसा कि एयरपोर्ट के सीसीटीवी फुटेज में देखा गया था। आरएटी को तब तैनात किया जाता है जब दोहरे इंजन में खराबी हो या पूरी तरह से इलेक्ट्रॉनिक या हाइड्रोलिक फेलियर हो। इससे पहले 1980 के दशक में, डेल्टा एयर लाइन्स इंक के एक पायलट ने गलती से बोइंग 767 के इंजन का ईंधन बंद कर दिया था, जिसे वह उड़ा रहा था। लेकिन उस हालत में, वह उसे फिर से चालू करने में कामयाब रहा क्योंकि विमान आसमान में ऊंचा था, जिससे दुर्घटना टल गई।