गायों से भरी पिकअप पकड़कर लोगों ने किया पुलिस के हवाले, गौ तश्करी का आशंका पर नहीं हुई कार्यवाही, उरगा पुलिस की भूमिका संदेहास्पद

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उरगा (आधार स्तंभ) : आधी रात को पिकअप में गायों को भरकर ले जाते एन एच में ग्रामीणों ने पकड़ा। गौ तश्करी की आशंका पर भी उरगा पुलिस ने नहीं किया उचित कार्यवाही। फरसवानी के कुछ दलालों की सक्रिय भूमिका, उरगा पुलिस की भी भूमिका संदेह के घेरे में।

पिकअप ड्राइवर

10 अगस्त की रात्रि लगभग 11 बजे पुरैना के पास एन एच रोड में एक पिकअप को ग्रामीणों ने पकड़ा। पिकअप में लगभग 6 गायों को भरकर कोरबा की ओर ले जाया जा रहा था। ड्राइवर से पूछने पर पता चला कि उसके द्वारा फरसवानी ग्राम से गायों को पिकअप में भरकर बाल्को लेकर जाया जा रहा था। ड्राइवर ने बताया इसके लिए फरसवानी में किसी दलाल से 5000 रुपये में बात हुई थी ताकि गाड़ी को कोई रास्ते में न रोके। हालांकि फरसवानी के सरपंच द्वारा 4 गायों को ले जाने का एक पत्र उसके पास था लेकिन रात के अंधेरे में छुपकर गायों को ले जाने और फरसवानी के किसी दलाल से 5000 रुपये के लेनदेन की बात से गौ तश्करी का संदेह साफ साफ प्रतीत होता है। ड्राइवर द्वारा बताया गया कि इससे पहले भी उसके द्वारा तीन चार बार अलग अलग जगहों से गायों को गाड़ी में ले जाया जा चुका है।

ग्रामीणों द्वारा इसकी सूचना उरगा थाने में दी गई उरगा थाना द्वारा गायों को रात में फरसवानी वापस भेजकर पिकअप को फाइन कर छोड़ दिया गया। उरगा पुलिस द्वारा कितना का फाइन किया गया और कौन से धारा के तहत फाइन किया गया यह बात छुपाया जा रहा है। देखा जाए तो उरगा पुलिस द्वारा इस प्रकरण में सही ढंग से जांच पड़ताल तक करना जरूरी नहीं समझा गया।

पूर्व में भी गौमांस के साथ पकड़ाया था युवक

कुछ दिनों पूर्व भी कोरबा निवासी एक युवक को गौमांस साथ सरगबुंदिया के ग्रामीणों ने पकड़ा था। उक्त युवक द्वारा पहंदा फाटक के पास ट्रैन में कटे एक गाय का मांस काटकर थैले में भरकर ले जाया जा रहा था, उसके पास गाय काटने के लिए एक हथियार भी मिला था। इसकी सूचना भी उरगा पुलिस को दी गई थी किंतु न तो पुलिस द्वारा गौमांस का जप्ती बनाया गया, न ही हथियार जप्त किया गया और न ही उक्त युवक के खिलाफ कोई उचित कार्यवाही की गई बस खानापूर्ति कर के युवक को छोड़ दिया गया था।

अब सिर्फ सोशल मीडिया में होता है गौसेवा व गौरक्षा धरातल में जीरो

सरगबुंदिया में गौमांस के साथ पकड़े गए युवक की जानकारी हिन्दू संगठनों और गौसेवकों को भी दी गई थी लेकिन किसी के भी द्वारा उस पर संज्ञान नहीं लिया गया और न ही उस पर कार्यवाही करवाने में किसी ने रुचि दिखाई। जब उरगा थाना प्रभारी से इसकी जानकारी ली गई तो उनका कहना था कि उसके खिलाफ कोई आवेदक नहीं मिला इसलिए उसको छोड़ना पड़ा। इन सब घटनाओं को देखने पर प्रतीत होता है कि अब गौसेवा और गौरक्षा सिर्फ सोशल मीडिया तक ही सीमित रह गया है जबकि धरातल में वास्तविक कुछ और है। लोग अब सिर्फ फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप आदि सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर ही गौसेवा करते नजर आते हैं।

 

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